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झारखंड की सियासत में उबाल: हेमंत सोरेन के टीएमसी प्रचार दौरे पर कांग्रेस–भाजपा आमने-सामने, दुमका में तीखी बयानबाज़ी

Ranchi: झारखंड की राजनीति इन दिनों उस समय और गरमा गई जब मुख्यमंत्री Hemant Soren ने पश्चिम बंगाल में जाकर All India Trinamool Congress (टीएमसी) के पक्ष में चुनाव प्रचार किया। इस कदम ने राज्य के भीतर गठबंधन राजनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं और कांग्रेस तथा भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। खासतौर पर यह मुद्दा तब और संवेदनशील हो गया जब झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच राजनीतिक सीमाओं को लेकर बहस शुरू हो गई।

दुमका में इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी उस समय और तेज हो गई जब कांग्रेस विधायक दल के नेता Pradeep Yadav ने स्पष्ट किया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और कांग्रेस का गठबंधन केवल राज्य की राजनीति तक सीमित है। उन्होंने कहा कि यह गठबंधन किसी अन्य राज्य के चुनावों के लिए नहीं बना है और हर दल को अपनी रणनीति और विस्तार की स्वतंत्रता है। उनके अनुसार क्षेत्रीय दल अक्सर अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए अन्य राज्यों में भी सक्रिय होते हैं, जिसे गलत नहीं माना जा सकता।

प्रदीप यादव ने आगे यह भी जोड़ा कि जेएमएम पहले भी अन्य राज्यों में अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर चुका है, जैसे कि असम में उम्मीदवार उतारना। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद इंडिया गठबंधन के तहत कांग्रेस और जेएमएम के संबंध मजबूत बने हुए हैं और इस तरह की गतिविधियों से गठबंधन पर कोई विशेष असर नहीं पड़ता। उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस फिलहाल इस मुद्दे को ज्यादा तूल देने के पक्ष में नहीं है।

दूसरी ओर भाजपा ने इस पूरे मामले को कांग्रेस की कमजोरी के रूप में प्रस्तुत किया है। पूर्व रघुवर सरकार में मंत्री रहे भाजपा नेता Randhir Singh ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन ने कांग्रेस को नजरअंदाज करते हुए टीएमसी के लिए प्रचार किया, जो इस बात का प्रमाण है कि सत्ता में बने रहने के लिए कांग्रेस ने जेएमएम के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि जेएमएम चाहे जो भी कदम उठाए, कांग्रेस उसे सहन करने को मजबूर है।

रणधीर सिंह ने असम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी जेएमएम ने कांग्रेस के खिलाफ उम्मीदवार उतारे थे, फिर भी कांग्रेस ने कोई सख्त रुख नहीं अपनाया। उनके अनुसार यह स्थिति कांग्रेस की राजनीतिक मजबूरी को दर्शाती है और आने वाले समय में इसका असर चुनावी राजनीति पर भी पड़ सकता है। भाजपा इस मुद्दे को राज्य में एक बड़े राजनीतिक नैरेटिव के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है।

दिलचस्प बात यह है कि ये दोनों नेता दुमका में एक मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट पहुंचे थे, जहां उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान अपने-अपने दलों का पक्ष रखा। इस मौके पर दिए गए उनके बयान अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गए हैं और राज्य की सियासत में नई हलचल पैदा कर रहे हैं।

इसी दौरान महिला आरक्षण बिल को लेकर भी दोनों नेताओं ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। प्रदीप यादव ने Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2023 को लेकर केंद्र सरकार पर राजनीतिक स्वार्थ का आरोप लगाया और कहा कि यह विधेयक परिसीमन के जरिए राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने मांग की कि पहले जातिगत जनगणना कराई जाए और उसके बाद ही इस तरह का कानून लागू किया जाए।

वहीं भाजपा नेता रणधीर सिंह ने कांग्रेस के इस रुख की आलोचना करते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल का विरोध करने का खामियाजा कांग्रेस को भविष्य में भुगतना पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि देश की महिलाएं इस मुद्दे पर कांग्रेस को सबक सिखाएंगी। इस तरह यह पूरा मामला अब केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहकर राष्ट्रीय राजनीति के विभिन्न मुद्दों से भी जुड़ गया है, जिससे सियासी तापमान और बढ़ने की संभावना है।

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