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भारत निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर झामुमो का सवाल, पश्चिम बंगाल में वोटर सूची से नाम हटाने को बताया लोकतंत्र पर हमला

Ranchi: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भारत निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए उस पर पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है। पार्टी के केंद्रीय महासचिव और प्रवक्ता Supriyo Bhattacharya ने कहा कि आयोग की कार्यशैली लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत प्रतीत होती है।

सुप्रियो भट्टाचार्या ने पश्चिम बंगाल में Special Intensive Revision (SIR) के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया। उनका दावा है कि लगभग 27 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं, जिससे न केवल उनका मताधिकार प्रभावित हुआ है, बल्कि उनकी नागरिकता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।

उन्होंने कहा कि मतदान लोकतंत्र की बुनियाद है और इसे सुरक्षित रखना निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है। हर वर्ष 25 जनवरी को ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ मनाने वाला आयोग “कोई वोटर छूटे नहीं” के अपने संकल्प से भटकता नजर आ रहा है। भट्टाचार्या ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि 1980 के दशक में बाहुबलियों को मतदान का ठेका दिया जाता था, लेकिन अब ऐसा प्रतीत होता है कि यह “ठेका” स्वयं निर्वाचन आयोग ने भाजपा को दे दिया है।

झामुमो नेता ने यह भी सवाल उठाया कि जिन लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, क्या वे अपनी नागरिकता साबित करने के लिए ट्रिब्यूनल के चक्कर काटने को मजबूर होंगे? उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल में 19 ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं और लोगों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ सकती है, जो आम नागरिकों के लिए बेहद कठिन है।

भट्टाचार्या ने निर्वाचन आयोग की सोशल मीडिया पोस्ट्स की भाषा पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि किसी संवैधानिक संस्था की भाषा निष्पक्ष और संतुलित होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान में आयोग की कार्यशैली राजनीतिक प्रभाव में काम करती हुई प्रतीत हो रही है। उन्होंने असम का उदाहरण देते हुए पूछा कि जहां SIR की अधिक आवश्यकता थी, वहां इस तरह की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई।

हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन बनाने के लिए की गई है। आयोग के अनुसार, डुप्लिकेट, मृत, स्थानांतरित या अयोग्य प्रविष्टियों को हटाने के लिए यह कदम उठाया गया है। कुल 90 लाख से अधिक नामों की समीक्षा के बाद लगभग 27.16 लाख लोगों को अयोग्य पाया गया, जिससे राज्य में मतदाताओं की संख्या में करीब 12 प्रतिशत की कमी आई है।

झामुमो ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताते हुए जनता से सतर्क रहने और अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की है। पार्टी का कहना है कि संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता बनाए रखना देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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