Jamshedpur: टाटा स्टील के CEO और MD टी. वी. नरेंद्रन ने कहा है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का सीधा असर कंपनी की उत्पादन लागत पर पड़ रहा है। जमशेदपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि मौजूदा हालात कंपनी के लिए चुनौतीपूर्ण जरूर हैं, लेकिन इसका असर कर्मचारियों पर नहीं पड़ने दिया जाएगा।
जमशेदपुर के बिस्टुपुर स्थित माइकल जॉन ऑडिटोरियम में मीडिया से बातचीत करते हुए नरेंद्रन ने कहा कि युद्ध के चलते वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसका असर स्टील इंडस्ट्री पर भी देखने को मिल रहा है और उत्पादन के लिए जरूरी संसाधनों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है।
उन्होंने बताया कि माल ढुलाई में बढ़े खर्च के कारण कंपनी की उत्पादन लागत में इजाफा हुआ है। समुद्री मार्गों में बढ़े जोखिम के चलते बीमा लागत में भी 7 से 10 डॉलर तक की वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर कंपनी के मुनाफे और ऑपरेशनल कॉस्ट पर पड़ रहा है।
युद्ध का सबसे ज्यादा असर कंपनी की सब्सिडियरी टिनप्लेट यूनिट पर पड़ा है, जो मुख्य रूप से प्रोपेन गैस पर निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय सप्लाई बाधित होने के कारण प्रोपेन गैस की भारी कमी हो गई है और वर्तमान में कंपनी के पास केवल दो दिन का स्टॉक ही बचा है।
स्थिति को संभालने के लिए कंपनी वैकल्पिक उपायों पर काम कर रही है और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध टैंकरों के जरिए गैस की आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश कर रही है। हालांकि नरेंद्रन ने चेतावनी दी कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो संकट और गहरा सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी अपने उत्पादन के लिए कोयला और चूना पत्थर जैसे कच्चे माल का आयात करती है, जिस पर भी युद्ध का असर पड़ा है। इसके अलावा ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हुई है, जिससे कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई पर अस्थायी असर पड़ा है और इसका असर कंपनी की कैंटीन सेवाओं तक पहुंचा है।
इसके बावजूद T. V. Narendran ने स्पष्ट किया कि कंपनी कर्मचारियों के हितों की पूरी सुरक्षा करेगी और मौजूदा परिस्थितियों का असर उनके रोजगार या सुविधाओं पर नहीं पड़ने दिया जाएगा।


