East Singhbhum: चुआड़ विद्रोह के नायक को लेकर उठे विवाद के बीच भारत मुंडा समाज का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला प्रखंड अंतर्गत सुदूरवर्ती गांव झाटीझरना पहुंचा। यह गांव गालुडीह से लगभग 25-30 किलोमीटर उत्तर-पूर्व दिशा में पहाड़ों की तराई में बसा हुआ है। प्रतिनिधिमंडल ने यहां चुआड़ विद्रोह के महान क्रांतिकारी स्व. रघुनाथ सिंह (भूमिज मुंडा) के वंशजों से मुलाकात कर ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी जुटाई। 
प्रतिनिधिमंडल में भारत मुंडा समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एतवा मुंडा, प्रदेश अध्यक्ष सुशील पाहन और प्रदेश उपाध्यक्ष नयन गोपाल सिंह (भूमिज मुंडा) शामिल थे। स्थानीय आदिवासी समाज के सहयोग से टीम ने गांव का भ्रमण किया और ऐतिहासिक तथ्यों की पड़ताल की।
सबसे पहले प्रतिनिधिमंडल ने गांव के बीच स्थापित स्व. रघुनाथ सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उनके आठवीं और नौवीं पीढ़ी के वंशजों से विस्तृत बातचीत की गई। वंशजों में संजय सिंह, महीन सिंह, अमित सिंह, मालु सिंह और रिजेश्वर सिंह सहित अन्य लोगों ने अपने पूर्वजों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। 
वंशजों द्वारा प्रस्तुत वंशावली के अनुसार, प्रथम पीढ़ी में स्व. जगरनाथ सिंह (आन्दोलनकारी), द्वितीय पीढ़ी में स्व. बैधनाथ सिंह (आन्दोलनकारी) और तृतीय पीढ़ी में स्वयं स्व. रघुनाथ सिंह (भूमिज मुंडा) को चुआड़ विद्रोह का नायक बताया गया। इसके अलावा नौवीं पीढ़ी तक की पूरी वंशावली और जमीन-जायदाद से संबंधित खतियान दस्तावेज भी प्रतिनिधिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किए गए। वंशजों ने यह भी बताया कि विद्रोह के दौरान उपयोग की गई तलवार आज भी उनके पास एक धरोहर के रूप में सुरक्षित है।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इन तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि चुआड़ विद्रोह के मूल और वास्तविक नायक स्व. रघुनाथ सिंह (भूमिज मुंडा) ही थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अन्य समुदायों द्वारा इस इतिहास को बदलने और किसी अन्य व्यक्ति को नायक के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो तथ्यों के विपरीत है।

दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने गांव की भौगोलिक और प्राकृतिक विशेषताओं का भी अवलोकन किया। पहाड़ों की गोद में बसे इस गांव में एक झरना सालभर बहता है, जिससे बिना बिजली और मोटर के पाइपलाइन के जरिए पूरे गांव को शुद्ध पेयजल उपलब्ध होता है। इसे प्रतिनिधिमंडल ने प्रकृति का अनोखा वरदान बताया।
हालांकि, गांव के विकास की स्थिति काफी चिंताजनक पाई गई। शिक्षा के क्षेत्र में गंभीर कमी है—गांव में मात्र एक व्यक्ति इंटरमीडिएट पास है, जो पंचायत सचिव के रूप में कार्यरत है, जबकि कुछ ही छात्रों ने मैट्रिक उत्तीर्ण किया है। स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं और सड़क संपर्क की स्थिति भी बेहद खराब है। रोजगार के अवसरों का भी अभाव देखा गया।
प्रदेश अध्यक्ष सुशील पाहन ने कहा कि झारखंड के आदिवासी क्रांतिकारियों ने देश की आजादी और अस्मिता के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि ऐसे महान क्रांतिकारियों के वंशजों और उनके गांवों के विकास के लिए विशेष सरकारी योजनाएं चलाई जाएं, ताकि उन्हें वास्तविक सम्मान मिल सके। 
उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास को किसी भी तरह से तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने या “हाईजैक” करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। सही इतिहास को सामने लाना और उसे संरक्षित करना सभी की जिम्मेदारी है।
भारत मुंडा समाज ने राज्य सरकार से मांग की है कि चुआड़ विद्रोह जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों के वास्तविक नायकों को मान्यता दी जाए और उनके गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जाए।



