Khunti: खूंटी जिला के कर्रा प्रखंड में सोमवार को मनरेगा कानून की बहाली और कथित नई योजना के विरोध में सैकड़ों मजदूरों व ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया। अबुआ ग्राम सभा कर्रा के बैनर तले निकाले गए इस जुलूस ने कर्रा मिशन मोड स्थित आम बगीचा से प्रखंड सह अंचल कार्यालय तक मार्च किया, जहां एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। 
कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता और ‘आयरन लेडी’ के नाम से चर्चित दायमनी बारला मुख्य रूप से मौजूद रहीं। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज आंदोलन के दो प्रमुख उद्देश्य हैं—पहला, “जी राम जी योजना” को रद्द कराना और दूसरा, वर्ष 2006 के मनरेगा कानून को पूर्ववत लागू करवाना। साथ ही उन्होंने बताया कि सैकड़ों मजदूरों द्वारा काम की मांग को लेकर आवेदन भी प्रशासन को सौंपा गया है। 
सभा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा कानून ने बीते करीब दो दशकों में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी देने के साथ-साथ कृषि और बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जमीन समतलीकरण, मेंड़बंदी, तालाब-कुआं निर्माण, फलदार बगीचों का विकास और मुर्गी शेड जैसी योजनाओं से गांव-गांव में व्यापक लाभ हुआ है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन में ग्राम सभा की सहमति अहम रही है, जिससे पूरे समुदाय को फायदा मिला। 
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2025 में केंद्र की सरकार द्वारा मनरेगा कानून को समाप्त कर “विकसित भारत ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (विबीजीरामजी)” लागू किया गया है, जिससे ग्रामीणों के अधिकार सीमित हो गए हैं। उनका कहना है कि नई योजना के तहत केवल केंद्र द्वारा अनुमोदित योजनाएं ही लागू होंगी और बरसात के मौसम में 60 दिनों तक योजना बंद रहने से मजदूरों की आजीविका प्रभावित होगी।
धरना में यह भी मुद्दा उठा कि जमीन के दस्तावेजों के डिजिटलीकरण के नाम पर आदिवासी और मूलवासी किसानों की जमीनों में छेड़छाड़ हो रही है, जिससे भूमि अधिकारों पर खतरा बढ़ गया है। वक्ताओं ने इसे “जमीन लूट” करार देते हुए इसके खिलाफ व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी। 
प्रदर्शन के दौरान मजदूरों और ग्रामीणों ने जोरदार नारेबाजी की। “मनरेगा कानून वापस लाओ”, “हर हाथ को काम दो, काम का पूरा दाम दो”, “ऑनलाइन के बहाने जमीन लूटना बंद करो” और “मोदी सरकार की मनमानी नहीं चलेगी” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
इस दौरान प्रखण्ड विकास पदाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें प्रमुख मांगों में विबीजीरामजी योजना को रद्द करना, मनरेगा कानून की सभी पुरानी व्यवस्थाओं को लागू करना, रोजगार की अवधि 100 दिनों से बढ़ाकर 150 दिन करना, मजदूरी दर 500 रुपये से अधिक करना और जमीन से जुड़े ऑनलाइन दस्तावेजों में छेड़छाड़ रोकना शामिल है। 
इस आंदोलन में झारखंड लोक अधिकार मंच के फादर टॉम, आदिवासी मूलवासी रक्षा मंच के फादू तोपनो, दयाल कोनगाड़ी, बिरसा संगा, जुलयानी हेमरोम, अजित होरो, बुधनाथ प्रधान, सुनील होरो, रीता तिडू, बेरोनिका धान, हिरामनी भेंगरा, जॉर्ज धान, फ्रांसीस हेमरोम, मनुएल धान सहित जबड़ा, घोरपिंडा, लुदरू, जोने, तिक्की और कर्रा गांव के सैकड़ों ग्रामीण व मजदूर शामिल हुए।



