Khunti: खूंटी जिला, जिसे देश में हॉकी की “नर्सरी” के रूप में जाना जाता है, अब एक नए ऐतिहासिक मोड़ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। यहां अंतरराष्ट्रीय हॉकी मुकाबले के आयोजन की संभावना लगातार मजबूत हो रही है, जिससे जिलेवासियों में उत्साह और उम्मीद दोनों चरम पर हैं।
खूंटी की पहचान महान हॉकी खिलाड़ी मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की जन्मभूमि के रूप में है। उनके नेतृत्व में भारतीय हॉकी टीम ने 1928 एम्स्टर्डम ओलंपिक में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाकर इतिहास रच दिया था। इतनी गौरवशाली विरासत होने के बावजूद आज तक इस धरती पर कोई भी अंतरराष्ट्रीय हॉकी मुकाबला आयोजित नहीं हो सका—यह बात हमेशा से खेल प्रेमियों को खटकती रही है।
लेकिन अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है। खूंटी में तेजी से विकसित हो रही खेल अधोसंरचना ने इस कमी को दूर करने की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर दिया है। जिले में दो अत्याधुनिक एस्ट्रोटर्फ हॉकी मैदान हैं। एक बिरसा कॉलेज परिसर में विकसित किया गया है, जबकि दूसरा एसएस हाई स्कूल मैदान में है।
विशेष रूप से एसएस हाई स्कूल का मैदान, जो पहले एक साधारण खेल मैदान था, अब आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। यहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एस्ट्रोटर्फ बिछाया गया है, साथ ही छह हाई मास्ट लाइटें लगाई गई हैं, जिससे रात के समय भी मैच आयोजित किए जा सकेंगे। इसके अतिरिक्त खिलाड़ियों के लिए ड्रेसिंग रूम, दर्शकों के बैठने की व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर भी पहल किया जा रहा है।
इन विकास कार्यों ने जिले के युवाओं और खेल प्रेमियों के बीच नई ऊर्जा भर दी है। लोगों का मानना है कि यदि यहां अंतरराष्ट्रीय हॉकी मैच आयोजित होते हैं, तो यह न केवल खूंटी बल्कि पूरे झारखंड के लिए गर्व का क्षण होगा। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को बड़ा मंच मिलेगा और क्षेत्र में खेल संस्कृति को और अधिक मजबूती मिलेगी।
खूंटी की मिट्टी ने पहले भी देश को कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के हॉकी खिलाड़ी दिए हैं, और यही कारण है कि इस क्षेत्र को हॉकी की “नर्सरी” कहा जाता है। अब जब बुनियादी सुविधाएं तैयार हो रही हैं, तो उम्मीद की जा रही है कि खेल विभाग और प्रशासन मिलकर इस दिशा में ठोस पहल करेंगे।
फिलहाल सबकी नजरें आने वाले समय पर टिकी हैं कि क्या मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की इस ऐतिहासिक धरती पर पहली बार अंतरराष्ट्रीय हॉकी मैच का सपना साकार होगा? यदि ऐसा होता है, तो यह न केवल खेल के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ देगा, बल्कि खूंटी को वैश्विक खेल मानचित्र पर भी मजबूती से स्थापित कर देगा।


