Ranchi: झारखंड ने नीति आयोग के राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (FHI)-2026 में 50.5 अंकों के साथ देश के शीर्ष तीन राज्यों में अपनी जगह बनाई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य ने वित्तीय अनुशासन और विकासपरक नीतियों के चलते यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस सूची में झारखंड के साथ ओडिशा और गोवा भी शामिल हैं।
वित्तीय वर्ष 2023-24 के आंकड़ों पर आधारित इस रिपोर्ट में देश के 18 प्रमुख राज्यों के प्रदर्शन का विश्लेषण किया गया। झारखंड ने न केवल बेहतर प्रदर्शन किया, बल्कि अपने पड़ोसी राज्यों बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश को भी पीछे छोड़ दिया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि गुजरात और दक्षिण भारत के विकसित राज्य भी इस सूचकांक में झारखंड से पीछे रहे।
रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड की सफलता के दो मुख्य स्तंभ हैं। पहला, नियंत्रित राजकोषीय घाटा – राज्य ने अपने राजकोषीय घाटे को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 3 प्रतिशत से नीचे बनाए रखा, जो आर्थिक स्थिरता का महत्वपूर्ण संकेत है। दूसरा, मजबूत कर राजस्व – राज्य के कुल राजस्व में कर राजस्व की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक रही, जो प्रभावी और पारदर्शी कर संग्रह प्रणाली को दर्शाता है।
नीति आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि झारखंड का व्यय ढांचा संतुलित है। सरकार ने प्रशासनिक खर्चों की तुलना में आधारभूत संरचना, सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं पर निवेश बढ़ाया है। इसके साथ ही कर्ज प्रबंधन (Debt Management) में राज्य की स्थिति संतोषजनक पाई गई। रिपोर्ट में Capital Expenditure की गुणवत्ता बढ़ाने और निवेश को आकर्षित करने के लिए और प्रोत्साहन देने की सलाह भी दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर झारखंड इसी वित्तीय अनुशासन और विकासपरक नीतियों के साथ आगे बढ़ता रहा, तो यह जल्द ही देश की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी राज्य बन सकता है। इस उपलब्धि से न केवल राज्य की आर्थिक छवि मजबूत होगी, बल्कि निवेशकों के भरोसे को भी बढ़ावा मिलेगा।



