Ranchi: झारखंड में महिला सशक्तिकरण को लेकर लगातार दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन राज्य में महिला आयोग का गठन लंबे समय से लंबित है। राजधानी Ranchi में इस मुद्दे को लेकर पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने अपनी ही सरकार के कामकाज पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पिछले छह वर्षों से राज्य में महिला आयोग का गठन नहीं होना बेहद चिंताजनक है और इससे महिलाओं को न्याय पाने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए अंबा प्रसाद ने कहा कि एक महिला जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें भी डर लगता है कि अगर किसी महिला का अधिकार हनन होता है तो वह न्याय के लिए कहां जाएगी, क्योंकि राज्य में महिला आयोग ही अस्तित्व में नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से लेकर अदालतों तक इस मामले का संज्ञान लेने की अपील करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण की बातें तब तक अधूरी हैं, जब तक महिला आयोग जैसी संस्था सक्रिय रूप से काम नहीं करती।
जानकारी के मुताबिक झारखंड राज्य महिला आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष कल्याणी शरण का कार्यकाल 6 जून 2020 को समाप्त हो गया था। इसके बाद से अब तक आयोग में न तो नए अध्यक्ष की नियुक्ति हुई है और न ही सदस्यों की। आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली होने के कारण इसका कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
बताया जा रहा है कि महिला आयोग में कुल 4014 शिकायतें लंबित पड़ी हैं। इनमें घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन शोषण और मानव तस्करी जैसे गंभीर मामलों की शिकायतें शामिल हैं। आयोग का गठन नहीं होने के कारण इन मामलों की सुनवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है, जिससे पीड़ित महिलाओं को न्याय मिलने में लगातार देरी हो रही है।
गौरतलब है कि झारखंड राज्य महिला आयोग में एक अध्यक्ष और पांच सदस्यों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन फिलहाल सभी पद खाली पड़े हैं। इस कारण शिकायतें तो दर्ज हो रही हैं, लेकिन उन पर आगे की कार्रवाई नहीं हो पा रही है। ऐसे में महिला आयोग के जल्द गठन की मांग अब धीरे-धीरे तेज होती जा रही है।


