Ranchi: झारखंड आंदोलनकारियों के सम्मान और अधिकारों की मांग को लेकर झारखंड राज्य आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा ने बुधवार को झारखंड विधानसभा का घेराव किया। राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन की सरकार झारखंड राज्य निर्माण आंदोलन में योगदान देने वाले लोगों की लगातार अनदेखी कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने आंदोलनकारियों को न्याय, सम्मान और स्वाभिमान के साथ जीवन जीने का अधिकार देने की मांग उठाई।
मोर्चा के संस्थापक संरक्षक पुष्कर महतो ने कहा कि झारखंड आंदोलन के सबसे बड़े नेता शिबू सोरेन को भी राज्य सरकार ने अब तक आधिकारिक रूप से झारखंड आंदोलनकारी के रूप में गजट नोटिफिकेशन नहीं किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने शिबू सोरेन को पद्म भूषण से सम्मानित किया है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से उन्हें आंदोलनकारी के रूप में मान्यता नहीं देना दुर्भाग्यपूर्ण है।
प्रदर्शन में शामिल गुमला से आई सुभाषिनी कुजूर ने कहा कि उनके पति ने झारखंड राज्य निर्माण आंदोलन में अपनी जान दे दी थी, लेकिन आज उनके परिवार को उचित सम्मान और आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों के परिवारों को कम से कम 50 हजार रुपये मासिक पेंशन मिलनी चाहिए, ताकि वे सम्मान के साथ जीवन जी सकें।
मोर्चा के केंद्रीय सचिव प्रो. रतनलाल महतो ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक आंदोलनकारियों की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि कई आंदोलनकारी आज आर्थिक तंगी, कुपोषण और बीमारियों से जूझ रहे हैं, जबकि उनके परिवारों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
मोर्चा ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें दिशोम गुरु शिबू सोरेन को झारखंड आंदोलनकारी के रूप में गजट नोटिफिकेशन जारी करना, सभी आंदोलनकारियों को 50 हजार रुपये सम्मान पेंशन देना, उनके आश्रितों को सीधे रोजगार देना और झारखंड आंदोलनकारियों की स्मृति में “आंदोलनकारी कॉरिडोर” का निर्माण कर प्रमुख चौक-चौराहों पर शिलालेख स्थापित करना शामिल है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक इन मांगों पर सरकार ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।


