Ranchi: झारखंड में मई-जून 2026 के आसपास होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य में दो खाली सीटों पर चुनाव होना तय है, जिसमें एक सीट दिशोम गुरु शिबू सोरेन (झारखंड मुक्ति मोर्चा) के निधन के कारण 4 अगस्त 2025 से खाली है, जबकि दूसरी सीट भाजपा के दीपक प्रकाश का कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त होने के बाद खाली होगी। इस चुनाव में राज्य की राजनीति की दिशा और सत्तारूढ़ महागठबंधन तथा विपक्षी भाजपा की रणनीतियों पर भी नजर रहेगी।
भाजपा इस चुनाव को लेकर सक्रिय मंथन में है और पार्टी का मानना है कि भले ही वर्तमान आंकड़े उनके पक्ष में न हों, फिर भी चुनावी रणनीति के जरिए कम से कम एक सीट हासिल की जा सकती है। भाजपा प्रवक्ता अविनेष कुमार ने कहा कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस विषय पर विचार-विमर्श कर अंतिम निर्णय लेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव की घोषणा होते ही विपक्षी दलों के कुछ विधायक सत्तारूढ़ हेमंत सरकार के खिलाफ भाजपा का समर्थन कर सकते हैं।
झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्य हैं। सत्तारूढ़ महागठबंधन, जिसमें झामुमो, कांग्रेस, आरजेडी और सीपीआई माले शामिल हैं, के पास कुल 56 विधायक हैं। इसके मुकाबले एनडीए में भाजपा के 21, आजसू, जदयू और लोजपा रामविलास के पास 1-1 विधायक हैं, जबकि एक सीट जेएलकेएम के पास है। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 28 वोटों की आवश्यकता होगी। इस गणित के आधार पर पहली सीट झामुमो के खाते में जाना तय मानी जा रही है।
दूसरी सीट पर मुकाबला अधिक रोचक होगा। यदि महागठबंधन एकजुट रहता है, तो भाजपा के लिए चुनौती बढ़ सकती है। दूसरी ओर, भाजपा को उम्मीद है कि चुनावी रणनीति और विपक्षी विधायकों के समर्थन से वह इस सीट को अपने पक्ष में कर सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे झारखंड की आगामी विधानसभा और केंद्रीय राजनीति में अहम संकेत के तौर पर देख रहे हैं।
राज्यसभा चुनाव से पहले दोनों पक्षों की तैयारियों और रणनीतियों ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। भाजपा और महागठबंधन दोनों ही इस चुनाव को अपनी शक्ति और प्रभाव दिखाने का अवसर मान रहे हैं। मई-जून 2026 में होने वाले इस चुनाव के नतीजे राज्य की राजनीति में नई दिशा तय कर सकते हैं और अगले विधानसभा चुनावों के लिए भी संकेत प्रदान कर सकते हैं।



