Breaking News

Giridihi Mayoral Election: सुदिव्य की रणनीति के आगे भाजपा पस्त, प्रमिला मेहरा की 14,599 वोटों से ऐतिहासिक जीत

Giridihi :गिरिडीह नगर निगम के महापौर चुनाव में इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिला। झारखंड मुक्ति मोर्चा की रणनीति के सामने भारतीय जनता पार्टी को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। जेएमएम समर्थित प्रमिला मेहरा ने भाजपा समर्थित प्रत्याशी डॉ. शैलेंद्र चौधरी को 14,599 मतों से हराकर इतिहास रच दिया। गिरिडीह नगर निगम को पहली बार एक महिला महापौर मिली है।

प्रमिला मेहरा को कुल 38,091 वोट मिले, जबकि भाजपा समर्थित डॉ. शैलेंद्र चौधरी को 23,492 मतों से संतोष करना पड़ा। नतीजों के बाद समर्थकों में जबरदस्त उत्साह दिखा। प्रमिला मेहरा ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिलाध्यक्ष संजय सिंह के साथ बाजार समिति स्थित मतगणना केंद्र पहुंचकर जीत का प्रमाण पत्र प्राप्त किया।

भाजपा की बड़ी फौज भी नहीं बचा सकी सीट

चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व मंत्री राज पालीवार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रविंद्र राय, प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश और पूर्व विधायक अमित मंडल समेत कई बड़े नेता गिरिडीह में डेरा डाले रहे। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ऋतुराज सिन्हा भी दो बार प्रचार के लिए पहुंचे। लगातार बैठकों और जनसंपर्क अभियानों के बावजूद मतदाता प्रभावित नहीं हुए।

सुदिव्य कुमार की रणनीति बनी गेमचेंजर

दूसरी ओर सुदिव्य कुमार की रणनीति पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने संगठित तरीके से काम किया। जिलाध्यक्ष संजय सिंह के नेतृत्व में बूथ स्तर तक मॉनिटरिंग की गई। कार्यकर्ताओं को एकजुट रखा गया और सभी जाति-धर्म के मतदाताओं को विश्वास में लेने की कोशिश की गई। इसका परिणाम यह हुआ कि भाजपा समर्थित प्रत्याशी को निर्णायक हार का सामना करना पड़ा।

बागियों को साधने में जेएमएम आगे

नामांकन के दौरान भाजपा और जेएमएम दोनों दलों में बगावत देखने को मिली। लेकिन जहां भाजपा अपने बागियों को मनाने में विफल रही, वहीं जेएमएम ने स्थिति संभाल ली। भाजपा से बागी होकर मैदान में उतरे नागेश्वर दास और प्रकाश दास ने अंततः प्रमिला मेहरा का समर्थन कर दिया और पार्टी को अलविदा कह दिया। वहीं भाजपा के बागी कामेश्वर पासवान ने खुले मंच से पार्टी नेतृत्व की आलोचना की।

यूजीसी नियम और सवर्ण वोटों का असर

चुनाव परिणामों में यूजीसी से जुड़े नियमों का मुद्दा भी प्रभावी रहा। सवर्ण समाज के एक वर्ग ने भाजपा से दूरी बना ली, जिसका सीधा लाभ जेएमएम को मिला। मंत्री सुदिव्य कुमार और संगठन ने इस वर्ग के मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में सफलता पाई। भाजपा द्वारा कई सवर्ण नेताओं को बुलाने के बावजूद अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखा।

अन्य प्रत्याशियों का प्रदर्शन

कांग्रेस समर्थित समीर राज चौधरी को मात्र 1,084 वोट मिले। भाजपा के बागी कामेश्वर पासवान को 3,787 वोट, अर्जुन बैठा को 5,708 वोट मिले। जेकेएलएम समर्थित फूल देवी को 2,253 और भाकपा माले समर्थित गौरव कुमार को 2,398 मत प्राप्त हुए। अन्य प्रत्याशी भी हजार-दो हजार के आंकड़े तक ही सीमित रहे।

इस चुनाव परिणाम ने स्पष्ट कर दिया कि स्थानीय रणनीति, संगठनात्मक मजबूती और सामाजिक समीकरणों की समझ बड़े नेताओं के प्रचार से अधिक प्रभावी साबित हुई। गिरिडीह की जनता ने इस बार एक नई राजनीतिक दिशा तय की है, जिसमें पहली महिला महापौर के रूप में प्रमिला मेहरा की ऐतिहासिक जीत दर्ज हो चुकी है।

Share Article:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

विज्ञापन

SWARAJ

त्योहार के मौकेपर धमाकेदार ऑफर

संपर्क करें:- खूंटी- 8210983506 तोरपा - 6203436010

Recent Posts

Tags

Edit Template

About

Print & Digital PR News Release Ranchi,

Recent Post