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आदिवासी जमीन पर राज परिवार की दावेदारी से बढ़ा तनाव, धारा 163 लागू

Khunti: खिजूर टोली स्थित जरिया गढ़ थाना के समीप शनिवार को आदिवासी जमीन पर राज परिवार के उत्तराधिकारी द्वारा दावेदारी के मामले को लेकर संयुक्त पड़हा संघ एवं विभिन्न ग्राम सभाओं की विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में सैकड़ों ग्रामीण, युवा और महिला-पुरुष शामिल हुए।

बैठक के दौरान ग्रामीणों द्वारा संबंधित खाली जमीन पर घेराबंदी का कार्य किया जा रहा था। इसी बीच कर्रा अंचल कर्मियों के साथ जरिया गढ़, कर्रा, तोरपा समेत अन्य थाना प्रभारियों एवं महिला-पुरुष पुलिस बल ने पहुंचकर अनुमंडल दंडाधिकारी, खूंटी के आदेशानुसार धारा 163 के तहत नोटिस जारी कर कार्य को तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया। प्रशासन की ओर से दोनों पक्षों को आगामी 60 दिनों तक जमीन पर किसी प्रकार का कार्य नहीं करने का निर्देश दिया गया तथा मामला न्यायालय में विचाराधीन होने की जानकारी दी गई।

आदिवासी जमीन पर गलत दावेदारी का आरोप

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने आरोप लगाया कि जरिया गढ़ खिजूर टोली मौजा की करीब पांच एकड़ आदिवासी जमीन को कथित रूप से गलत तरीके से ऑनलाइन दर्ज कराकर राज परिवार द्वारा दावेदारी करने का प्रयास किया जा रहा है। बैठक में खतियान धारकों के नाम, खाता, प्लॉट संख्या एवं रकबा का उल्लेख किया गया तथा आदिवासी रैयतों द्वारा जमीन से संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए।

वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी मूल रैयतों की जमीन को किसी भी कीमत पर हड़पने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी एवं कर्मचारी पैसे के लालच में गलत कार्य कर रहे हैं, जिससे मूलवासी रैयतों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों से एकजुट होकर शांतिपूर्ण आंदोलन चलाने की अपील की गई। साथ ही नशापान त्यागने, बच्चों को बेहतर शिक्षा देने और नियोजन में भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

राज परिवार का पक्ष

दूसरी ओर, राज परिवार के ठाकुर जयेंद्र नाथ शाहदेव ने बताया कि मौजा जरिया, थाना संख्या 25 में वर्ष 1935 में निबंधित दस्तावेज संख्या 356 के तहत इस्तीफा खाता 31 एवं 32 के रैयतों द्वारा तत्कालीन जमींदार ठाकुर महेन्द्र नाथ शाहदेव को भूमि हस्तांतरित की गई थी। इसके एवज में तत्कालीन रैयतों को 90 रुपये का भुगतान किया गया था तथा लगान में भी कमी की गई थी, जिसका उल्लेख निबंधित दस्तावेज में है।

उन्होंने बताया कि जमींदारी उन्मूलन के पश्चात भूमि की जमाबंदी अंचल कार्यालय में उनके पोतों के नाम दर्ज कराई गई और तब से अब तक भूमि पर दखल-कब्जा एवं नियमित राजस्व भुगतान किया जा रहा है।

खतियानी रैयतों का दावा

वहीं, खतियानी रैयतों के वंशजों ने कहा कि खतियान में उनके दादा का नाम दर्ज है और उसी आधार पर वे भूमि पर अपना दावा प्रस्तुत कर रहे हैं।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

कर्रा की अंचल अधिकारी अन्वेषा ओना ने बताया कि अनुमंडल पदाधिकारी, खूंटी के आदेश पर संबंधित जमीन पर धारा 163 लागू की गई है। आगामी 60 दिनों तक किसी भी पक्ष द्वारा जमीन पर कोई कार्य नहीं किया जाएगा।

बैठक का संचालन सामुएल होरो ने किया। इस अवसर पर पड़हा राजा नामजन होरो, संयुक्त पड़हा संघ के संयोजक शिबू होरो, झारखंड आंदोलनकारी हेमंत तोपनो, कुदलुम मुखिया संदीप हेरेंज, बमरजा मुखिया अनूप कुजूर, जोनसन होरो, भिनसेंट संगा, सोशन होरो, समुएल संगा, एतवा मुंडा, जोसेफ होरो, विकास होरो, प्रेम प्रकाश होरो, बिमल होरो, रोहित मुंडा सहित सैकड़ों महिला-पुरुष उपस्थित रहे।

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