Ranchi: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान प्रवासी श्रमिकों के रजिस्ट्रेशन और मुआवजे का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। डुमरी से जेएलकेएम विधायक जयराम कुमार महतो ने सरकार से पूछा कि राज्य के लगभग 16 लाख प्रवासी मजदूरों में से अब तक बहुत कम का ही रजिस्ट्रेशन हुआ है। साथ ही उन्होंने दूसरे राज्यों में असमय मृत्यु होने पर दिए जाने वाले 50 हजार रुपये के मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की मांग की।
रजिस्ट्रेशन बढ़ाने का आश्वासन
श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के मंत्री संजय प्रसाद यादव ने जवाब में बताया कि श्रमाधान पोर्टल पर 16 फरवरी तक 2,19,169 प्रवासी श्रमिकों का पंजीकरण हो चुका है। बाकी श्रमिकों के रजिस्ट्रेशन के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक मजदूर खुद आगे आकर पंजीकरण कराएं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस प्रक्रिया को और गंभीरता से आगे बढ़ाया जाएगा।
मुआवजा राशि बढ़ाने की जरूरत स्वीकार
मंत्री ने बताया कि दूसरे राज्यों में सामान्य या दुर्घटना में मृत्यु होने पर पार्थिव शरीर को पैतृक निवास तक लाने के लिए मुख्यमंत्री झारखंड प्रवासी श्रमिक दुर्घटना कोष से 50 हजार रुपये की सहायता दी जाती है। विभाग की ओर से हर संभव सहयोग किया जाता है। हालांकि, उन्होंने माना कि मुआवजा राशि बढ़ाने की जरूरत है और इस विषय पर मुख्यमंत्री से चर्चा की जाएगी।
प्रवासी श्रमिक आयोग पर सरकार का रुख
विधायक जयराम महतो ने झारखंड प्रवासी श्रमिक आयोग के गठन को लेकर भी सवाल उठाया। इस पर मंत्री ने कहा कि फिलहाल इसकी आवश्यकता नहीं है, क्योंकि डोरंडा स्थित श्रम विभाग के नियंत्रण कक्ष के माध्यम से प्रवासी श्रमिकों से संबंधित मामलों का समाधान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कोरोना काल में राज्य सरकार ने बस, ट्रेन और यहां तक कि हवाई जहाज के जरिए भी श्रमिकों को वापस लाने की व्यवस्था की थी।
सदन में उठे इस मुद्दे से साफ है कि प्रवासी श्रमिकों के पंजीकरण और सामाजिक सुरक्षा को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ रहा है, और आने वाले दिनों में इस पर ठोस निर्णय की उम्मीद की जा सकती है।


