Khunti: खूंटी जिले में सड़क सुरक्षा समिति और परिवहन विभाग द्वारा लगातार लोगों को जागरूक करने के प्रयास किए जा रहे हैं। लगभग प्रतिदिन हेलमेट जांच अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वालों से जुर्माना वसूला जा रहा है। उद्देश्य स्पष्ट है—सड़क हादसों को रोकना और लोगों की जान बचाना। यह पहल सराहनीय जरूर है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जहां वास्तव में हादसों की आशंका सबसे अधिक है, वहां विभागीय लापरवाही साफ तौर पर नजर आ रही है।
खूंटी–तोरपा मुख्य मार्ग पर पेलोल में बनई नदी पर बने पुल के टूटने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर एक डायवर्सन का निर्माण कराया गया। दुर्भाग्यवश यह डायवर्सन आज भी अधूरा और असुरक्षित स्थिति में है। इसके बावजूद इसी रास्ते से सभी छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही हो रही है, जबकि आधिकारिक रूप से इस मार्ग को अब तक चालू नहीं किया गया है।
डायवर्सन स्थल पर न तो पर्याप्त साइनेज लगाया गया है, न ही स्पीड ब्रेकर की व्यवस्था की गई है। सबसे गंभीर बात यह है कि वहां “डायवर्सन आगे है” जैसा कोई सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया है, जिससे वाहन चालकों को समय रहते सतर्क किया जा सके। नतीजा यह है कि तेज रफ्तार में आने वाले वाहन अचानक डायवर्सन देखकर संतुलन खो बैठते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले एक महीने में ही इस क्षेत्र में करीब चार बड़े सड़क हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद न तो परिवहन विभाग और न ही संबंधित निर्माण एजेंसी द्वारा कोई ठोस कार्रवाई की गई है। हादसों को रोकने या कम करने के लिए अब तक कोई प्रभावी पहल नजर नहीं आई है।
यह मार्ग एक स्टेट हाईवे है, जिस पर अंतरराज्यीय और अन्य जिलों से आने वाले भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। बाहरी जिलों या राज्यों से आने वाले वाहन चालकों को मार्ग की जानकारी नहीं होती, ऐसे में अचानक सामने आने वाला अधूरा डायवर्सन उनके लिए जानलेवा साबित हो रहा है।
ताजा घटना में आज एक बार फिर इसी डायवर्सन के पास एक बस और ऑटो के बीच जोरदार टक्कर हो गई। इस हादसे में एक मासूम बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच में जुट गई है।
स्थानीय लोगों में इस स्थिति को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि समय रहते डायवर्सन को सुरक्षित तरीके से तैयार किया जाए, उचित संकेतक, ब्रेकर और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, तो कई जानें बचाई जा सकती हैं। अब सवाल यह है कि सड़क सुरक्षा के नाम पर केवल चालान काटना ही काफी है या फिर उन खतरनाक स्थलों पर भी ध्यान दिया जाएगा, जहां हर दिन लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है।



