Ranchi: झारखंड कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के पांच विधायकों ने दिल्ली में डेरा डालकर कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात की और अपनी नाराजगी जाहिर की। आलाकमान से बातचीत के बाद सभी विधायक रांची लौट आए हैं। विधायकों का कहना है कि वे व्यक्तिगत शिकायत नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं और संगठन की भावनाओं को पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाने दिल्ली गए थे।
सरकार और संगठन की कार्यशैली पर उठाए सवाल
रांची लौटने के बाद बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में विधायक दल के उपनेता और खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने कहा कि झारखंड सरकार में कांग्रेस एक अहम सहयोगी दल है। ऐसे में जरूरी है कि जिन्हें सरकार और संगठन में जिम्मेदारी मिली है, वे विधायकों और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलें। उन्होंने कहा कि सत्ता में होने के बावजूद अगर शासन के तरीके में बदलाव नहीं दिखेगा तो जनता को इसका लाभ नहीं मिलेगा।
कार्यकर्ताओं की नाराजगी से आलाकमान को कराया अवगत
दिल्ली जाने वाले विधायकों में राजेश कच्छप (खिजरी), सुरेश बैठा (कांके), नमन विक्सल कोंगाड़ी (कोलेबिरा), सोनेराम सिंकू (जगन्नाथपुर) और भूषण बाड़ा (सिमडेगा) शामिल थे। विधायकों ने बताया कि राज्य में कांग्रेस कोटे से बने चार मंत्रियों की कार्यशैली से पार्टी कार्यकर्ता असंतुष्ट हैं। इसी असंतोष को आलाकमान के सामने रखने के लिए वे सामूहिक रूप से दिल्ली गए थे।
खड़गे और वेणुगोपाल से हुई मुलाकात
राजेश कच्छप ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और के. राजू से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी तीन बार राज्य की स्थिति से शीर्ष नेतृत्व को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन समस्याएं लगातार बनी हुई हैं।
बोर्ड-निगम और आयोगों में पद खाली होने पर चिंता
विधायकों ने यह मुद्दा भी उठाया कि दोबारा सत्ता में आए हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन बोर्ड, निगम और आयोगों में अब तक कई पद खाली हैं। उन्होंने इन पदों को जल्द भरने की मांग की, ताकि संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय बन सके।
मंत्रिमंडल फेरबदल के संकेत
कांग्रेस विधायकों ने यह भी कहा कि पार्टी के सभी विधायक योग्य हैं और नेतृत्व स्तर पर रोटेशन या बदलाव पर विचार संभव है। कांके विधायक सुरेश बैठा ने कहा कि कांग्रेस में कई ऐसे विधायक हैं, जो मंत्री बनने की क्षमता रखते हैं। केवल मौजूदा चार मंत्री ही योग्य नहीं हैं। जरूरत पड़ने पर मंत्रिमंडल में फेरबदल किया जा सकता है।
संगठन को मजबूत करने की मंशा
कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने कहा कि उनका उद्देश्य संगठन को धारदार बनाना और सरकार को जनता के प्रति अधिक जवाबदेह बनाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहल पार्टी और सरकार दोनों के हित में की गई है।
महागठबंधन सरकार में कांग्रेस के चार मंत्री हैं, लेकिन पांच विधायकों की यह नाराजगी पार्टी के भीतर बढ़ते तनाव की ओर इशारा कर रही है। अब इस पूरे मामले पर आलाकमान क्या फैसला लेता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।



