Ranchi: रांची पुलिस द्वारा मानव तस्करों के चंगुल से रेस्क्यू किए गए बच्चों के पुनर्वास के लिए जिला प्रशासन ने विशेष पहल शुरू कर दी है। डीसी रांची मंजूनाथ भजंत्री ने बच्चों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए हैं।
मनोचिकित्सकों की काउंसलिंग और शेल्टर होम में सुरक्षा
बरामद सभी बच्चों को फिलहाल सुरक्षित शेल्टर होम में रखा जाएगा। यहां बच्चों को मानसिक सहायता देने के लिए मनोचिकित्सक काउंसलिंग सत्र आयोजित करेंगे। डीसी ने बताया कि बच्चों की मानसिक स्थिति पर ध्यान देते हुए उन्हें ट्रॉमा से उबरने में मदद की जाएगी। शेल्टर होम में 24×7 सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
शिक्षा और सरकारी सुविधाओं का लाभ
डीसी ने यह भी निर्देश दिए कि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसलिए उन्हें नजदीकी स्कूलों में नामांकन कराया जाएगा। उन्हें मिड-डे मील, यूनिफॉर्म, किताबें और अन्य सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
माता-पिता की खोज में तेजी
रेस्क्यू किए गए बच्चों के माता-पिता या अभिभावकों की तलाश के लिए प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है। विभिन्न जिलों और राज्यों में सूचनाएं साझा की जा रही हैं। जब तक माता-पिता का पता नहीं चलता, बच्चे शेल्टर होम में रहेंगे।
जिला प्रशासन और विशेषज्ञों की सक्रिय भूमिका
इस मामले में चाइल्ड वेलफेयर कमिटी (CWC), पुलिस और सामाजिक कल्याण विभाग की संयुक्त टीम काम कर रही है। शेल्टर होम्स की क्षमता बढ़ा दी गई है और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की त्वरित कार्रवाई से बच्चों का सामाजिक पुनर्वास आसान होगा।
अंश और अंशिका बने राह
बीते रविवार को रांची पुलिस ने एक बड़े बच्चा चोर गिरोह का पर्दाफाश किया, जिसमें 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया और दर्जन भर बच्चों को रेस्क्यू किया गया। इस गिरोह की पहचान गुलगुलिया गैंग के रूप में हुई, जो पिछले दस वर्षों से बच्चों की चोरी और उन्हें बेचने में लिप्त था। बरामद बच्चों को बोकारो, धनबाद, चाईबासा और रांची से चोरी किया गया था। पुलिस इन बच्चों के परिजनों की तलाश कर रही है और गिरोह में शामिल अन्य लोगों को भी गिरफ्तार करने के लिए विशेष टीम लगी हुई है।


