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राज्यस्तरीय शोकसभा में गूंजा आक्रोश—चार दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं, सोमा मुंडा हत्याकांड पर झारखंड बंद की चेतावनी

Khunti: पड़हा राजा सोमा मुंडा की निर्मम हत्या के बाद पूरे आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है। हत्या के चार दिन बीत जाने के बावजूद खूंटी पुलिस द्वारा अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं किए जाने से लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में आज हुटार के जियारप्पा में सोमा मुंडा के लिए राज्यस्तरीय शोकसभा का आयोजन किया गया, जिसमें झारखंड के विभिन्न जिलों से आदिवासी समाज के अगुआ नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। शोकसभा स्थल पर माहौल पूरी तरह ग़म और आक्रोश से भरा रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत सोमा मुंडा की तस्वीर पर माल्यार्पण और दो मिनट का मौन रखकर की गई। वक्ताओं ने कहा कि सोमा मुंडा केवल एक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि आदिवासी समाज की परंपरा, अस्मिता और न्याय व्यवस्था के मजबूत स्तंभ थे। उनकी हत्या ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। इसके बावजूद पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली यह दर्शाती है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है।

सभा को संबोधित करते हुए आदिवासी नेताओं ने खूंटी पुलिस पर तीखा हमला बोला। वक्ताओं ने कहा कि चार दिन बाद भी हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं होना यह साबित करता है कि खूंटी पुलिस पूरी तरह नाकाम और निकम्मी साबित हुई है।

यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो आदिवासी समाज चुप नहीं बैठेगा। नेताओं ने चेतावनी दी कि अभी तक केवल खूंटी में आक्रोश प्रदर्शन और जाम किया गया है, लेकिन आगे पूरे झारखंड में चक्का जाम किया जाएगा। इस दौरान सरकारी और गैर-सरकारी सभी प्रकार के कार्यों को अनिश्चित काल तक ठप कर दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

वक्ताओं ने राज्य सरकार से मांग की कि सोमा मुंडा के परिजनों को सुरक्षा, मुआवजा, नौकरी सहित वे सभी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं, जिनकी मांग मांग पत्र के माध्यम से की गई है। नेताओं ने कहा कि जब तक परिवार को न्याय नहीं मिलेगा और हत्यारे सलाखों के पीछे नहीं जाएंगे, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

शोकसभा के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि इस मुद्दे को लेकर 13 जनवरी को रांची में आदिवासी समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई है जिसमें झारखण्ड बंद और बंदी का रूप रेखा तैयार करने को लेकर चर्चा किया जाएगा और आगामी 17 जनवरी को पूरे झारखंड में बंद बुलाया जाएगा। नेताओं ने कहा कि यह बंद शांतिपूर्ण होगा, लेकिन सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए मजबूर करने वाला होगा।

शोकसभा के अंत में आदिवासी समाज के लोगों ने एक स्वर में सोमा मुंडा को न्याय दिलाने का संकल्प लिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान “हत्यारों को गिरफ्तार करो”, “सोमा मुंडा को न्याय दो” जैसे नारों से इलाका गूंजता रहा। साफ है कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है और राज्यभर में व्यापक असर डाल सकता है।

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