Palamu: झारखंड के वन्य जीव और जंगलों के क्षेत्र में 2025 का साल ऐतिहासिक रहा। इस वर्ष झारखंड के इतिहास में पहली बार बाघ का रेस्क्यू किया गया, वहीं हाथी और गौर पर नई रिपोर्ट जारी हुई और पहली बार संरक्षित क्षेत्र से गांवों को विस्थापित भी किया गया।
बाघ का रेस्क्यू और संख्या में वृद्धि
25 जून को रांची के सिल्ली के मारदू गांव में पूरनचंद महतो के घर में बाघ घुस गया। किसी को नुकसान नहीं पहुंचाने के बाद पलामू टाइगर रिजर्व और वन विभाग की टीम ने 1–3 घंटे के अभियान के बाद बाघ का रेस्क्यू किया और उसे सुरक्षित तरीके से पलामू टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया।
रेस्क्यू किए गए बाघ को सम्राट और किला के नाम से जाना जाता है। यह बाघ पहले पलामू किला के इलाके में देखा गया था और बंगाल के पुरुलिया तक लंबा सफर कर चुका था। पलामू टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या अब छह हो गई है। इसके अलावा, चतरा और हजारीबाग समेत अन्य इलाकों में बाघों के मूवमेंट को रिकॉर्ड किया गया है।
हाथी और गौर की रिपोर्ट
अक्टूबर 2025 में झारखंड में हाथियों का सर्वे किया गया। रिपोर्ट में राज्य में हाथियों की संख्या केवल 217 बताई गई, जबकि 2017 में यह संख्या 678 थी। अकेले पलामू टाइगर रिजर्व में लगभग 180 हाथी थे।
गौर की रिपोर्ट में पलामू टाइगर रिजर्व में लगभग 60 गौर पाए गए, जिन्हें आनुवंशिक रूप से कमजोर बताया गया। इस रिपोर्ट का उद्देश्य राज्य के वन्य जीवों की वास्तविक संख्या और संरक्षण की योजना तैयार करना है।
संरक्षित एरिया से गांवों का विस्थापन
2025 में पहली बार किसी संरक्षित एरिया से गांवों की पूरी आबादी का विस्थापन किया गया। पलामू टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में बसे जयगीर और कुजरूम गांव की आबादी को पलामू के पोलपोल इलाके में 80 घरों सहित मॉडल गांव में बसाया गया। विस्थापितों को मुआवजा और कई सुविधाएं भी प्रदान की गई हैं।
वन्य जीवन संरक्षण और पलामू टाइगर रिजर्व का महत्व
पलामू टाइगर रिजर्व में पहली बार बाघों की संरक्षण गतिविधियों और मूवमेंट ट्रैकिंग की गई। वर्ष 2025 में ग्रासलैंड बढ़ाए गए और वन्य जीवों के लिए संरक्षण के कई कदम उठाए गए। पलामू टाइगर रिजर्व देश के उन टाइगर रिजर्वों में शामिल है, जहां पहली बार बाघ संरक्षण और गिनती पर खास ध्यान दिया गया।
प्रजेशकांत जेना, उपनिदेशक, पलामू टाइगर रिजर्व: “पलामू टाइगर रिजर्व और झारखंड के जंगलों में बाघों की संख्या बढ़ रही है। यह वन्य जीवन संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।”2025 झारखंड के वन्य जीवन और संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है।



