Jamtara: झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के विधानसभा क्षेत्र में स्थित जामताड़ा सदर अस्पताल अपनी खस्ता हालत के लिए चर्चा में है। अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट लंबे समय से बंद पड़ा है और यह स्पष्ट नहीं है कि इसे कब चालू किया जाएगा। इस प्लांट के निर्माण का उद्देश्य मरीजों को समय पर ऑक्सीजन सुविधा उपलब्ध कराना था, लेकिन आज इसके लाभ यहां के मरीजों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
डायलिसिस सेंटर की दयनीय स्थिति
सदर अस्पताल के डायलिसिस सेंटर का हाल भी गंभीर है। भवन की स्थिति दयनीय है और बारिश के मौसम में छत से पानी टपकता है। मरीजों को डिस्टिल्ड वॉटर बाहर से लाकर इलाज करवाना पड़ता है। सेंटर पीपीपी मोड में संचालित है और इसे संजीवनी संस्था द्वारा प्रबंधित किया जाता है।
भाजपा प्रदेश महिला उपाध्यक्ष बबीता झा ने इस कुव्यवस्था को उजागर करते हुए बताया कि सेंटर में मरीजों का इलाज समय से नहीं हो रहा। डायलिसिस की अवधि सिर्फ डेढ़ घंटे होती है, जबकि यह चार घंटे तक चलनी चाहिए। उन्होंने अस्पताल की स्थिति में सुधार की तत्काल मांग की है।
गरीबों और असहाय लोगों के लिए मुख्य अस्पताल
सदर अस्पताल जिले का मुख्य सरकारी अस्पताल है और यहां जिले के ग्रामीण क्षेत्र के गरीब एवं असहाय लोग इलाज कराते हैं। अस्पताल की इन खामियों को लेकर कई शिकायतें मिल चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई सुधार नहीं किया गया है।
सिविल सर्जन का बयान
अस्पताल की खस्ताहाल सुविधाओं को लेकर सिविल सर्जन ने कहा कि डायलिसिस भवन की मरम्मत का काम चल रहा है। वहीं बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट के लिए एजेंसी से एएमसी (वार्षिक मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट) के लिए पत्र लिखा गया है। एएमसी पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, कब तक प्लांट चालू हो पाएगा, इस पर सिविल सर्जन ने कोई समय सीमा नहीं दी।
यह स्थिति दिखाती है कि स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जिले के गरीब और असहाय मरीजों को सीधा असर पड़ रहा है, और क्षेत्रीय नेतृत्व से इस दिशा में तत्काल सुधार की उम्मीद की जा रही है।


