Ranchi : सिकिदिरी हाइडेल प्लांट की मरम्मत में अनियमितताओं के चलते बिजली विभाग को 134 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। जांच कमेटी ने इस मामले में छह अधिकारियों को दोषी पाया है, जिन्होंने लापरवाही बरती। विभाग ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है।
यह मामला वर्ष 2012-2013 में बीएचईएल को सिकिदिरी हाइडेल प्लांट के मरम्मत कार्य आवंटन से जुड़ा है, जिसकी सीबीआई जांच भी चल रही है। मरम्मत के दौरान अधिकारियों की अनदेखी के कारण विभाग को अब तक 134 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कॉमर्शियल कोर्ट के निर्देश के बाद बिजली निगम ने अनदेखी करने वाले अधिकारियों की पहचान के लिए जांच कमेटी गठित की थी। इस कमेटी में जीएम (एचआर) सुनील दत्त खाखा, ऊर्जा विभाग के संयुक्त सचिव सौरभ सिन्हा और जीएम (वित्त) डीके महापात्रा शामिल थे। जांच के बाद कमेटी ने प्रबंधन को रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें छह अधिकारियों को दोषी पाया गया।
जिन अधिकारियों को दोषी पाया गया है, उनमें जीएम (एचआर-उत्पादन) अमर नायक, जीएम (तकनीकी) कुमुद रंजन सिन्हा, तत्कालीन प्रोजेक्ट मैनजर प्रदीप शर्मा, कार्यपालक अभियंता संजय सिंह और दो विधि अधिकारी शामिल हैं।
मामले का मूल कारण 2012-2013 में बीएचईएल द्वारा निजी कंपनी नार्दन पावर को कार्य आवंटन था। इस कार्य के भुगतान के लिए कंपनी ने मेरठ के एमएसएमई कोर्ट में अपील की। कोर्ट ने बीएचईएल को भुगतान करने का निर्देश दिया, और बाद में यह राशि 134 करोड़ रुपये तक बढ़ गई।
जांच में यह पाया गया कि कोर्ट में विभाग के दो अधिकारियों ने लगभग नौ महीने तक पक्ष नहीं रखा, जिससे कंपनी को लाभ मिल गया। असल में हाइडेल प्लांट की मरम्मत केवल शॉर्ट टर्म कार्य तक सीमित थी, जिसकी वास्तविक लागत केवल चार करोड़ रुपये थी, लेकिन सभी बिलों का सत्यापन कर दिया गया।
जब विभाग प्रबंधन को इस अनियमितता की जानकारी मिली, तो जांच कमेटी बनाई गई और एफआईआर करने का निर्देश भी दिया गया।



