Garhwa : गढ़वा जिले में मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत एक बड़ा घोटाला सामने आया है। योजना के आपूर्तिकर्ता उपेंद्र यादव ने न केवल स्वयं को, बल्कि अपने परिवार के 22 सदस्यों को भी लाभुक बनाकर करोड़ों रुपये की राशि हड़प ली। इस पूरे प्रकरण में गव्य विकास विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत की बात भी सामने आई है। मामला उजागर होने के बाद जिले में हड़कंप मचा हुआ है।
जानकारी के अनुसार, रमना प्रखंड के मड़वनिया गांव निवासी उपेंद्र यादव ने वित्तीय वर्ष 2019-20 से लेकर 2023-24 तक कई बार विभिन्न योजनाओं में लाभ लिया। उसने स्वयं के नाम से चार बार, पत्नी सुषमा देवी के नाम से पांच बार, भाइयों महेंद्र और सुरेंद्र यादव के नाम से कई बार, और अन्य परिजनों — भौजाई अनिता देवी, प्रमिला देवी, मां कौली कुंवर और रिश्तेदार विजय यादव की पत्नी प्रतिमा देवी के नाम से लाभ प्राप्त किया।
इस योजना के तहत उपेंद्र यादव ने दो बार पांच-पांच गाय की योजना, दो गाय की योजना, फाडर गोदाम, डीप बोरिंग, मिल्किंग मशीन, वर्मी कंपोस्ट, पनीर-खोआ यूनिट, और जैविक खाद यूनिट जैसी परियोजनाओं का लाभ अपने परिवार के नाम पर लिया। जांच में यह पाया गया है कि अधिकांश मामलों में सामग्री की आपूर्ति फर्जी दिखाई गई और केवल कागजी खानापूर्ति की गई।
इस पूरे घोटाले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है, क्योंकि एक ही परिवार के 22 लोगों को योजना का लाभ मिलना बिना उच्च स्तरीय मिलीभगत के संभव नहीं है। गव्य विकास विभाग के जिला अधिकारी ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा है कि पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घोटाला वर्षों से चल रहा था और योजना की राशि वास्तविक लाभुकों तक नहीं पहुंच रही थी। अब जब मामला सार्वजनिक हुआ है, तो ग्रामीणों ने मांग की है कि सरकार इस पूरे घोटाले की उच्च स्तरीय जांच कराए ताकि असली दोषियों को सजा मिल सके और भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके।



