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गढ़वा में डीएफओ और वनकर्मी बने बंधक, तीन थानों की पुलिस ने कराया मुक्त

Garhwa: गढ़वा जिले के रंका थाना क्षेत्र में सोमवार को वन विभाग के अधिकारियों को ग्रामीणों ने बंधक बना लिया। डीएफओ और उनकी टीम विस्थापितों के पुनर्वास के लिए सर्वेक्षण कर रहे थे, तभी ग्रामीण आक्रोशित होकर अधिकारियों को घेर लिया। घटना से इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

जानकारी के अनुसार, डीएफओ, रेंजर और वनरक्षक मंडल डैम के विस्थापितों के पुनर्वास हेतु सर्वेक्षण कार्य में जुटे थे। इसी दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और नाराजगी जगढ़वा में डीएफओ और वनकर्मी बने बंधक, तीन थानों की पुलिस ने कराया मुक्त

Garhwa: गढ़वा जिले के रंका थाना क्षेत्र में सोमवार को वन विभाग के अधिकारियों को ग्रामीणों ने बंधक बना लिया। डीएफओ और उनकी टीम विस्थापितों के पुनर्वास के लिए सर्वेक्षण कर रहे थे, तभी ग्रामीण आक्रोशित होकर अधिकारियों को घेर लिया। घटना से इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

जानकारी के अनुसार, डीएफओ, रेंजर और वनरक्षक मंडल डैम के विस्थापितों के पुनर्वास हेतु सर्वेक्षण कार्य में जुटे थे। इसी दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को बंधक बना लिया।

ग्रामीणों ने अधिकारियों को लगभग तीन किलोमीटर पैदल चलाकर रंका थाना क्षेत्र के बलिगढ़ खेल मैदान तक ले जाकर बंधक बनाकर रखा। इससे वहां तनावपूर्ण माहौल बन गया और आसपास के लोगों में भी डर व्याप्त हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही रंका, रामकंडा और भंडारिया थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। तीनों थानों की टीम ने ग्रामीणों से बातचीत कर समझौता कराया और अधिकारियों को सुरक्षित मुक्त कराया।

पुलिस और अधिकारियों के अनुसार, ग्रामीण विस्थापन और मुआवजा से जुड़ी समस्याओं को लेकर आक्रोशित थे। उन्होंने अधिकारियों से समाधान की मांग की और मामले को गंभीरता से उठाया।

यह घटना गढ़वा जिले में वन विभाग के कामकाज और ग्रामीण विस्थापन मुद्दों की संवेदनशीलता को उजागर करती है। प्रशासन अब ऐसी परिस्थितियों को रोकने के लिए जागरूकता और संवाद बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है।ताते हुए अधिकारियों को बंधक बना लिया।

ग्रामीणों ने अधिकारियों को लगभग तीन किलोमीटर पैदल चलाकर रंका थाना क्षेत्र के बलिगढ़ खेल मैदान तक ले जाकर बंधक बनाकर रखा। इससे वहां तनावपूर्ण माहौल बन गया और आसपास के लोगों में भी डर व्याप्त हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही रंका, रामकंडा और भंडारिया थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। तीनों थानों की टीम ने ग्रामीणों से बातचीत कर समझौता कराया और अधिकारियों को सुरक्षित मुक्त कराया।

पुलिस और अधिकारियों के अनुसार, ग्रामीण विस्थापन और मुआवजा से जुड़ी समस्याओं को लेकर आक्रोशित थे। उन्होंने अधिकारियों से समाधान की मांग की और मामले को गंभीरता से उठाया।

यह घटना गढ़वा जिले में वन विभाग के कामकाज और ग्रामीण विस्थापन मुद्दों की संवेदनशीलता को उजागर करती है। प्रशासन अब ऐसी परिस्थितियों को रोकने के लिए जागरूकता और संवाद बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है।

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