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झारखंड में कुड़मी बनाम आदिवासी: समानांतर रैलियों से बढ़ेगी सियासी गर्मी, टकराव की आशंका

Ranchi : झारखंड में कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी में शामिल करने की मांग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कुड़मी संगठनों ने आंदोलन तेज करने का एलान किया है, वहीं आदिवासी संगठनों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। दोनों पक्षों की समानांतर रैलियों से टकराव की आशंका बढ़ गई है।

रांची समेत कई जिलों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मी बढ़ गई है। कुड़मी समुदाय, जो फिलहाल ओबीसी श्रेणी में है, का कहना है कि वे मूल रूप से जंगलों पर निर्भर समाज हैं और सदियों से आदिवासी संस्कृति का हिस्सा रहे हैं।

कुड़मी समन्वय समिति ने नवंबर से दिसंबर के बीच कई जिलों — हजारीबाग, चंदनकियारी, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो — में रैलियों की घोषणा की है। आंदोलन का समापन 11 जनवरी को रांची के मोरहाबादी मैदान में “कुड़मी अधिकार महारैली” के रूप में होगा।

दूसरी ओर, आदिवासी संगठनों ने 12 अक्टूबर को उसी मैदान में अपनी शक्ति प्रदर्शन रैली आयोजित करने का एलान किया है। उनका कहना है कि कुड़मी को एसटी सूची में शामिल करना आदिवासियों के हक और पहचान पर सीधा हमला है।

आदिवासी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने कुड़मी समाज की मांग पर विचार किया, तो व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आरक्षण नहीं, बल्कि “पहचान और अस्तित्व” का प्रश्न है।

राज्य में दोनों पक्षों की रैलियों के कारण प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है। सुरक्षा एजेंसियों को टकराव रोकने के लिए सतर्क किया गया है। जानकारों का कहना है कि यह विवाद झारखंड की राजनीति में नई गर्मी और जातीय समीकरणों में हलचल ला सकता है।

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