Ranchi: आदिवासी समाज की जानी-मानी नेता निशा भगत हाल ही में पार्टी से निकाले जाने के बाद से लगातार आक्रामक तेवर में नजर आ रही हैं। रविवार को उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक पोस्ट साझा करते हुए परोक्ष रूप से जयराम महतो और उनके समर्थकों पर निशाना साधा।

निशा भगत ने लिखा—
“सावधान… आदिवासियों के पाले हुए मुर्गी-जानवरों का शिकार करने वाले टाइगर को भी हमारे पूर्वजों ने नहीं बख्शा, तो वर्तमान के स्वघोषित टाइगर कैसे बख्शे जाएंगे? जय आदिवासी।”
उनके इस बयान को सीधे तौर पर JLKM से निकाले जाने और कुर्मी/महतो समाज के साथ जारी तनातनी से जोड़कर देखा जा रहा है।
विवाद की जड़
गौरतलब है कि कुछ दिनों पूर्व JLKM प्रमुख जयराम महतो ने निशा भगत को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इसकी वजह बना था उनका बयान, जिसमें उन्होंने कहा था कि—
“आदिवासी बनने के लिए आदिवासी परिवार में जन्म लेना जरूरी है।”
यह बयान उस समय आया था, जब कुर्मी समाज आदिवासी दर्जे की मांग को लेकर आंदोलनरत था। निशा भगत के इस बयान के बाद कुर्मी समाज में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और पार्टी नेतृत्व ने उन्हें बाहर कर दिया।
पार्टी से बाहर, तेवर और तीखे
पार्टी से बाहर होने के बाद से निशा भगत लगातार JLKM नेतृत्व और कुर्मी समाज के खिलाफ मुखर हैं। उनकी सोशल मीडिया पोस्ट और बयानों में साफ दिख रहा है कि वे अब समझौते के मूड में नहीं हैं।
ताजा बयान में उन्होंने परोक्ष रूप से जयराम महतो को “स्वघोषित टाइगर” कहते हुए चेतावनी दी है कि आदिवासी समाज अपने अधिकारों और अस्मिता की रक्षा के लिए किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।

राजनीतिक हलचल तेज
निशा भगत के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि उनके तेवर आने वाले दिनों में आदिवासी बनाम कुर्मी समाज की खाई को और गहरा सकते हैं।



