Khunti: “पुनरूत्थान और जीवन मैं हूँ। जो मुझमें विश्वास करता है, वह मरने पर भी जीवित रहेगा।” (योहन 11:25)
इसी वचन को अपने जीवन का आधार मानकर धर्म और शिक्षा सेवा में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले फादर लेयो भेंगरा (73 वर्ष) का 1 सितम्बर को निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और रांची के मांडर स्थित लियंस अस्पताल में भर्ती थे। करीब दस दिनों तक जीवन और मृत्यु से संघर्ष करने के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली।

जन्म और प्रारंभिक जीवन
फादर लेयो भेंगरा का जन्म 19 नवम्बर 1952 को तोरपा पल्ली के चुरगी गांव में हुआ था। उनके पिता दिवंगत मंगरा भेंगरा और माता दिवंगत प्यारी भेंगरा गहरे धार्मिक स्वभाव के थे। पांच भाई-बहनों में फादर भेंगरा तीसरे स्थान पर थे। बचपन से ही उनके मन में पुरोहित बनने की गहरी इच्छा थी, जिसने आगे चलकर उनके जीवन की दिशा तय की।

शिक्षा और पुरोहिताई की राह
अपनी प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने संत जोसेफ उच्च विद्यालय, तोरपा से प्राप्त की। इंटरमीडिएट की पढ़ाई संत जेवियर कॉलेज, रांची से पूरी की। इसके बाद उन्होंने सेंट अल्बर्ट्स कॉलेज, रांची से दर्शनशास्त्र और ईशशास्त्र की उच्च शिक्षा ग्रहण की। इसी दौरान 1973 से 1976 तक उन्होंने संत जेवियर कॉलेज, रांची से विज्ञान में स्नातक (बी.ए.) भी किया।
1979 में सेंट अल्बर्ट्स कॉलेज में आर्चबिशप पियुस केरकेट्टा के हाथों उनका उपयाजकीय अभिषेक सम्पन्न हुआ। इसके बाद 10 अप्रैल 1980 को तोरपा के पवित्र हृदय गिरजाघर में उन्हें पूर्ण पुरोहिताई का आशीर्वाद दिया गया।

शिक्षा और प्रेरिताई सेवाएं
फादर लेयो भेंगरा ने अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा शिक्षा और धर्मसेवा कार्यों में लगाया।
1980 में उन्होंने अपनी सेवा की शुरुआत संत जुड कैथोलिक चर्च, नवाटोली, गुमला में सहायक पल्ली पुरोहित के रूप में की।
1988 से 1994 तक वे प्रकाश उच्च विद्यालय, हुलहुंडू में सहायक शिक्षक रहे।
1994 से 2000 तक तथा 2000 से 2012 तक वे क्रमशः तोरपा और गुमला के कैथोलिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत रहे।
18 अप्रैल 2013 को उन्हें खूंटी धर्मप्रांत के कैथोलिक विद्यालयों का निदेशक नियुक्त किया गया। इस जिम्मेदारी को उन्होंने 2022 तक निभाया।
4 अक्टूबर 2021 को वे संत मिखाएल महागिरजाघर, खूंटी में सहायक पल्ली पुरोहित बने और अपने अंतिम दिनों तक सक्रिय रूप से प्रेरिताई कार्यों में लगे रहे।
व्यक्तित्व और योगदान
फादर लेयो भेंगरा का जीवन अनुशासन, सादगी और सेवा का प्रतिरूप था। वे एक सख्त अनुशासनप्रिय शिक्षक रहे, जो विद्यार्थियों को सदैव सत्य, ईमानदारी और परिश्रम का महत्व समझाते थे। उनकी मिलनसार और ईमानदार छवि ने उन्हें समाज में विशेष पहचान दिलाई।
खूंटी धर्मप्रांत में शिक्षा को सशक्त आधार देने में उनका योगदान सदैव याद किया जाएगा। उन्होंने न केवल विद्यालयों के प्रबंधन और अनुशासन को मजबूत किया, बल्कि विद्यार्थियों और विश्वासियों को प्रेरणादायी जीवन जीने की दिशा भी दी।
अंतिम यात्रा और श्रद्धांजलि
फादर भेंगरा के निधन से न केवल खूंटी धर्मप्रांत, बल्कि पूरा शिक्षा जगत और व्यापक समाज शोकाकुल है। विभिन्न वर्गों के लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। श्रद्धांजलि स्वरूप लोगों ने कहा कि फादर भेंगरा का जीवन शिक्षा और प्रेरिताई कार्यों के प्रति समर्पण का आदर्श उदाहरण है।
सामाजिक और धार्मिक समुदायों ने प्रार्थना की कि प्रभु ईश्वर उन्हें अनंत शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार तथा विश्वासियों को इस कठिन समय में सांत्वना दें।
फादर लेयो भेंगरा अब हमारे बीच नहीं हैं, किंतु उनकी शिक्षा, अनुशासन और सेवा की मिसाल आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा देती रहेगी।



