Khunti : देशभर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीदों के परिजनों की बदहाली पर गंभीर चिंता जताई गई है। झारखंड के खूंटी जिले से राष्ट्रपति को भेजे गए एक ज्ञापन में शहीदों और उनके वंशजों को मान-सम्मान, आर्थिक सहयोग और रोजगार मुहैया कराने के लिए “शहीद आयोग” गठित करने की मांग की गई है।
दरअसल खूंटी के एक सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप मिश्रा ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा है जिस ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने मांग किया है कि, आज़ादी के 77 साल बाद भी अनेक शहीद परिवार उपेक्षित जीवन जी रहे हैं। शहीदों के नाम पर स्कूल, कॉलेज, सड़क, हवाई अड्डा और पुस्तकालय तो बनाए गए, लेकिन उनके परिजनों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। अधिकांश वंशज अब भी चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों या दिहाड़ी मजदूरी करने को मजबूर हैं।
उदाहरण के तौर पर झारखंड के महान क्रांतिकारी भगवान बिरसा मुंडा के परपोते सुखराम मुंडा का परिवार आज भी गरीबी से जूझ रहा है। उनकी पत्नी खेतों में मजदूरी कर गुजारा करती हैं, जबकि नेताओं और सरकारों ने उलीहातु (बिरसा की जन्मस्थली) के विकास और उनके परिजनों के लिए आवास एवं रोजगार का आश्वासन कई बार दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ज्ञापन में कहा गया है कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, गृह मंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री सभी का उलीहातु दौरा हो चुका है। कई घोषणाएँ भी हुईं, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं बदला। बिरसा मुंडा ही नहीं, बल्कि चौंद, भैरव, गया मुंडा, शेख भिखारी, पांडेय गणपत राय, नीलाम्बर-पीताम्बर, सिद्धू-कान्हू सहित अनगिनत शहीदों के वंशज आज भी उपेक्षा के शिकार हैं।
शिकायत है कि योजनाएँ तो बनती हैं लेकिन लाभ मुश्किल से 10% प्रभावित परिवारों तक ही पहुँचता है। शहीदों की जयंती और पुण्यतिथि पर बड़े आयोजन होते हैं, नेता आते हैं, श्रद्धांजलि देते हैं, घोषणाएँ करते हैं, लेकिन शहीदों के गाँव और परिजनों की हालत जस की तस बनी हुई है।
ज्ञापन में महामहिम राष्ट्रपति से मांग की गई है कि भारत सरकार एक राष्ट्रीय शहीद आयोग का गठन करे, जो देशभर के शहीद परिवारों और आश्रितों की स्थिति का आकलन कर उन्हें रोजगार, आवास और मान-सम्मान दिलाने का कार्य करे। यही उन वीर शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।



