Khunti: वैसे तो न जाने कितने ऐसे बेसहारा लोग है जो बेघर तो होते ही हैं साथ हीं भूखे और प्यासे सड़क किनारे सो भी जाते हैं। लेकिन अगर किसी का हंसता खेलता परिवार हो और देखते हीं देखते वो परिवार उजड़ जाए और उस परिवार का एक अकेली वृद्ध महिला बच जाये तो जरा सोचिये की उस वृद्ध महिला पर क्या गुजरेगी।
खूंटी के शहरी क्षेत्र में भी कुछ ऐसा हीं हुआ है जहां एक परिवार का आशियाना तो छिन हीं गया लेकिन परिवार भी उजड़ गया। जहां एक महिला का पति और बेटा की मृत्यु हो गई जिसके बाद वो बेसहारा लगभग 60 वर्षीय वृद्ध महिला आज सड़क किनारे जिंदगी गुजारने पर मजबूर हैं।
खूंटी के शहरी क्षेत्र के खूंटी टोली निवासी सीताराम गोप जिनका एक भरा पूरा परिवार था। खूंटी टोली में उनका खुद का मकान था लेकिन जमीन का एक ऐसा खेल हुआ कि जिस जमीन पर उनका घर था वो जमीन कागजी तौर पर किसी और का हो गया। जिसके बाद सीताराम गोप बेघर हो गया इसी क्रम में आज से लगभग पंद्रह-सोलह वर्ष पहले उनकी मौत हो गई और उसके लगभग पांच वर्ष बाद सीताराम गोप का पुत्र गुल्थू गोप(स्थानीय लोगों के अनुसार) की मौत हो गई। 
पति और बेटा के मृत्यु के बाद सीताराम गोप की पत्नी कभी अपने रिश्तेदारों के घर तो कभी सड़क किनारे रहने पर और मांग मांग कर खाने को मजबूर हो गई। इस समय वो खूंटी टोली के एक दुकान के बाहर जमीन पर एक कंबल के सहारे भूखी प्यासी रह रही है और मांग- मांग कर किसी तरह अपना पेट भरती है। वृद्ध महिला शारीरिक रूप से निःशक्त भी है और अभी वो काफी बीमार भी हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि अगर इसे तत्काल खाना और उचित ईलाज नहीं मिला तो शायद इनके जीवित रहने की संभावना कम है।
खैर जो भी हो फिलहाल इस बेसहारा वृद्ध महिला को तत्काल सहायता की आवश्यकता है, अगर इन्हें सरकारी या किसी निजी संस्था से कोई तत्काल मदद मिल जाए तो शायद इस वृद्ध की जान बच सकती है। क्योंकि इस बरसात के मौसम में बीमारी हालत और भूखे प्यासे सड़क किनारे सोई पड़ी है और आस भरी निगाहों से निहारती है कि शायद उन्हें कोई मदद कर दे।



