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महिला आरक्षण पर झारखंड में सियासी घमासान: मरांडी की विशेष सत्र की मांग पर JMM का पलटवार

Ranchi: झारखंड की राजनीति में महिला आरक्षण को लेकर बहस तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi ने मुख्यमंत्री Hemant Soren से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी का दौर भी शुरू हो गया है।

रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में मरांडी ने कहा कि उनकी पार्टी ने मुख्यमंत्री से मिलने के लिए समय मांगा था, लेकिन उन्हें समय नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि पार्टी के महामंत्री अमर कुमार बाउरी द्वारा 30 अप्रैल से लगातार प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन जब मुलाकात संभव नहीं हुई तो मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपनी मांगों से अवगत कराया गया।

मरांडी ने केंद्र सरकार द्वारा संसद में लाए गए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का हवाला देते हुए कहा कि यह कानून लागू होने पर लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित हो जाएंगी। उन्होंने दावा किया कि इससे झारखंड में लोकसभा सीटों की संख्या 14 से बढ़कर 21 हो सकती है, जिसमें सात सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसी तरह विधानसभा सीटों की संख्या भी बढ़कर 121 तक पहुंच सकती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि Jharkhand Mukti Morcha ने इस विधेयक के विरोध में मतदान किया था। इसलिए अब पार्टी चाहती है कि राज्य सरकार विशेष सत्र बुलाकर इस पर प्रस्ताव पारित करे और केंद्र सरकार को भेजे, ताकि महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिल सके।

वहीं, झामुमो ने मरांडी के आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। पार्टी के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री के पास “निरर्थक सवालों” के लिए समय नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई सकारात्मक और सार्थक एजेंडा हो, तो सरकार संवाद के लिए हमेशा तैयार रहती है।

भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि राज्य सरकार पहले ही नगर निकाय चुनावों में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कर चुकी है और ‘ट्रिपल टेस्ट’ की प्रक्रिया पूरी की गई है। उनके अनुसार, विपक्ष महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति कर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है।

इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में महिला नेतृत्व के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में झारखंड की राजनीति में और अधिक गरमा सकता है।

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