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सुरों की अमर मलिका आशा भोसले का निधन: 92 वर्ष की आयु में थमा संगीत का स्वर्णिम युग

Demise of the Immortal Queen of Melodies, Asha Bhosle: भारतीय संगीत जगत के लिए गहरा आघात पहुंचाने वाली खबर सामने आई है। दिग्गज पार्श्व गायिका आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में रविवार को मुंबई में निधन हो गया। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थीं और उन्हें मुंबई के कैंडी ब्रीच अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन से न केवल बॉलीवुड बल्कि संपूर्ण भारतीय संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

आशा भोसले के पुत्र आनंद भोसले ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि लोग सोमवार सुबह 11 बजे लोअर परेल स्थित उनके निवास ‘कासा ग्रांडे’ में अंतिम दर्शन कर सकेंगे। इसके बाद शाम 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

आशा भोसले, महान गायिका लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं और उन्होंने अपने लंबे और शानदार करियर में 12,000 से अधिक गीतों को अपनी मधुर आवाज दी। हिंदी के अलावा उन्होंने मराठी, बंगाली, गुजराती, तमिल, तेलुगु, मलयालम, पंजाबी और कई अन्य भारतीय तथा विदेशी भाषाओं में भी गीत गाए, जिससे वे विश्व स्तर पर पहचान बनाने में सफल रहीं।

उनके द्वारा गाए गए गीत आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसे हुए हैं। ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को’, ‘अभी ना जाओ छोड़कर’ और ‘इंतहा हो गई इंतजार की’ जैसे गीत उनकी बहुमुखी प्रतिभा के प्रतीक हैं। उन्होंने मीना कुमारी, मधुबाला, जीनत अमान, काजोल और उर्मिला मातोंडकर जैसी कई प्रसिद्ध अभिनेत्रियों को अपनी आवाज दी, जिससे उनकी लोकप्रियता कई पीढ़ियों तक बनी रही।

आशा भोसले को उनके अतुलनीय योगदान के लिए अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, कई फिल्मफेयर पुरस्कार, दादासाहेब फाल्के सम्मान और भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। वर्ष 2023 में उन्होंने अपने 90वें जन्मदिन के अवसर पर दुबई में आयोजित ‘Asha90: Live in Concert’ में प्रस्तुति देकर अपनी सक्रियता और संगीत के प्रति समर्पण का परिचय दिया।

महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मंत्री आशीष शेलार ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि “आज एक युग का अंत हो गया है। आशाताई की आवाज ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध किया। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।” उन्होंने यह भी बताया कि उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

आशा भोसले के इलाज में शामिल डॉक्टर डॉ. प्रतीत समदानी के अनुसार, उन्हें गंभीर चिकित्सीय समस्याएं थीं और मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण उनका निधन हुआ। उनके जाने से भारतीय संगीत का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया है, लेकिन उनकी सुरीली आवाज और अमर गीत सदैव संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित रहेंगे। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।

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