Hazaribagh: झारखंड के हजारीबाग और बोकारो जिलों में ट्रेजरी से हुई अवैध वित्तीय निकासी को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर इस कथित ट्रेजरी महाघोटाले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने इस मामले को गंभीर और संगठित आर्थिक अपराध बताते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या न्यायिक जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है।
मरांडी ने अपने पत्र में कहा कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है। उन्होंने इसे चर्चित चारा घोटाला से जोड़ते हुए आशंका जताई कि यह घोटाला भी उसी तरह बड़े पैमाने पर फैला हो सकता है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में बोकारो, हजारीबाग, साहिबगंज, गढ़वा और पलामू जिलों में 35 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी के संकेत मिले हैं।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि बोकारो में गिरफ्तार लेखपाल कौशल पांडेय को इस पूरे घोटाले का मुख्य आरोपी बताया जा रहा है, लेकिन मरांडी ने इस पर संदेह जताया है। उनका कहना है कि ई-कुबेर प्रणाली में छेड़छाड़, सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी की जन्मतिथि में बदलाव और करोड़ों रुपये की निकासी जैसे जटिल षड्यंत्र को कोई एक व्यक्ति अकेले अंजाम नहीं दे सकता। इससे उच्चस्तरीय मिलीभगत की आशंका मजबूत होती है।
नेता प्रतिपक्ष ने एक और गंभीर पहलू की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि बोकारो में उपेंद्र सिंह के नाम पर वेतन की राशि 63 बार अनु पांडे के खाते में स्थानांतरित होती रही, जबकि पुलिस विभाग को इसकी जानकारी तक नहीं हुई। उन्होंने इसे अत्यंत संदिग्ध बताते हुए कहा कि बिना वरीय अधिकारियों की जानकारी या संरक्षण के ऐसा संभव नहीं है।
मरांडी ने यह भी आरोप लगाया कि कौशल पांडेय जैसे व्यक्ति को पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता, पूर्व पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी, पूर्व डीआईजी पटेल मयूर कनैयालाल और पूर्व डीआईजी (बजट) नौशाद आलम द्वारा प्रशस्ति पत्र दिए गए थे। उनके अनुसार, यह तथ्य दर्शाता है कि आरोपी को संस्थागत स्तर पर संरक्षण और प्रोत्साहन प्राप्त था।
घोटाले की राशि में लगातार बढ़ोतरी भी चिंता का विषय है। बोकारो में जहां शुरुआत में 3.5 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की बात सामने आई थी, वहीं यह आंकड़ा बढ़कर 6 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसी प्रकार हजारीबाग में यह राशि 28 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात कही गई है। मरांडी का मानना है कि यदि इस मामले की गहन जांच की जाए, तो यह घोटाला हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
अंत में, बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इस बहुचर्चित और गंभीर मामले की जांच किसी स्वतंत्र और विश्वसनीय एजेंसी से कराई जाए। उनका कहना है कि जब पुलिस विभाग के कई अधिकारी स्वयं संदेह के घेरे में हों, तब उसी विभाग द्वारा जांच कराना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगा। उन्होंने सीबीआई या झारखंड उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करने पर बल दिया।


