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महादलित समाज को मुख्यधारा से जोड़ने की पहल: डीसी की मौजूदगी में 35 बच्चों का स्कूल में नामांकन, शिक्षा से बदलेगी तस्वीर

Palamu: पलामू जिले में महादलित समाज को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा एक सराहनीय पहल की गई है। लंबे समय से सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े इस समुदाय के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में पलामू की उपायुक्त समीरा एस की मौजूदगी में सदर प्रखंड के चियांकि और गणके गांवों में बच्चों का स्कूल में नामांकन कराया गया।

महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले की जयंती के अवसर पर झारखंड राज्य दिहाड़ी मजदूरी यूनियन द्वारा “स्कूल चलो अभियान” की शुरुआत की गई। इस अभियान के तहत चियांकि गांव में 20 और गणके गांव में 15 बच्चों का नामांकन कराया गया। उपायुक्त समीरा एस ने स्वयं उपस्थित होकर बच्चों के प्रवेश पत्रों पर हस्ताक्षर किए और अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक किया।

मेदिनीनगर सदर प्रखंड के इन क्षेत्रों में महादलित समाज के लगभग 90 परिवार निवास करते हैं, जिनके करीब 150 बच्चों को स्कूल से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पहले चरण में 35 बच्चों का नामांकन सफलतापूर्वक किया गया है, जबकि शेष बच्चों का नामांकन भी जल्द पूरा करने की योजना है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में सभी बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।

इस अवसर पर उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को महादलित परिवारों के विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही इस समाज के सशक्तिकरण का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। कार्यक्रम में जिला समाज कल्याण पदाधिकारी नीता चौहान, जिला शिक्षा अधीक्षक संदीप कुमार और अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे।

झारखंड राज्य दिहाड़ी मजदूरी यूनियन के प्रतिनिधि राजीव कुमार ने बताया कि महादलित समाज को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस समुदाय के लोगों के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है, ताकि वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें।

महादलित समाज के मुख्यधारा से दूर रहने का एक प्रमुख कारण उनका घुमंतू जीवन रहा है। स्थायी निवास और आवश्यक दस्तावेजों की कमी के कारण बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती रही है। वर्ष 2023 में किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि केवल 250 परिवारों के पास ही आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध थे। इसके बाद से प्रशासन ने दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया को तेज किया और चियांकि तथा गणके में कई परिवारों को स्थायी भूमि भी उपलब्ध कराई गई।

हालांकि, कुछ बच्चे वर्तमान में महुआ चुनने के लिए लातेहार क्षेत्र में गए हुए हैं, जिसके कारण उनका नामांकन फिलहाल नहीं हो सका है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उनके वापस लौटने के बाद उन्हें भी स्कूल से जोड़ा जाएगा। यह पहल न केवल शिक्षा के माध्यम से महादलित समाज के भविष्य को संवारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि सामाजिक समावेशन और समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक सकारात्मक प्रयास है।

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