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गुमला में जंगली हाथी का कहर: 28 वर्षीय युवक को कुचलकर मार डाला, गांव में दहशत और मातम का माहौल

Gumla: झारखंड के गुमला जिले में जंगली हाथी के हमले से एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक और भय का माहौल व्याप्त हो गया है। यह घटना घाघरा थाना क्षेत्र के बुरहु पतरा गांव में घटी, जहां 28 वर्षीय अनूप कुमार पांडे को हाथी ने कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। घटना के बाद गांव में मातम छा गया है और ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनूप कुमार पांडे बुरहु पावर ग्रिड में टेक्नीशियन के रूप में कार्यरत थे। वह बाइक से सांवरिया बिजली से संबंधित कार्य के लिए जा रहे थे। रास्ते में पतरा के समीप कुछ लोगों की भीड़ देखकर उन्होंने अपनी बाइक रोक दी। इसी दौरान झाड़ियों में छिपे एक जंगली हाथी ने अचानक उन पर हमला कर दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। हाथी के अचानक हमले से वहां अफरा-तफरी मच गई और ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। फॉरेस्टर बिरसा लोहरा, शमी आफताब और सुनील राम पीटर ने मृतक के परिजनों को तत्काल राहत के रूप में 25 हजार रुपये की नगद सहायता प्रदान की। साथ ही आश्वासन दिया कि शेष मुआवजा राशि आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द ही उपलब्ध करा दी जाएगी।

पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल गुमला भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं, वन विभाग की टीम हाथी की गतिविधियों पर नजर रख रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में जंगली हाथियों का आवागमन लगातार बना रहता है, जिससे फसलों और घरों को भी नुकसान पहुंचता है। इसके बावजूद अब तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। इस घटना के बाद लोगों में भय और असुरक्षा की भावना और भी बढ़ गई है।

गुमला वन प्रमंडल पदाधिकारी बेलाल अहमद ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगली हाथियों से छेड़छाड़ न करें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें। उन्होंने यह भी कहा कि वन विभाग द्वारा लगातार निगरानी और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सके।

यह घटना एक बार फिर मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के प्राकृतिक आवास में कमी और भोजन की तलाश में उनके आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख करने से इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में दीर्घकालिक और प्रभावी समाधान की आवश्यकता है, ताकि मानव जीवन और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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