Ranchi: रांची स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) में नॉन टीचिंग स्टाफ का आंदोलन सोमवार को 17वें दिन भी जारी रहा। कर्मचारियों ने एसीपी और एमएसीपी के लाभ की मांग को लेकर काला बिल्ला बांधकर हड़ताल पर रहने का संकल्प जताया। सोमवार को यह आंदोलन उग्र रूप ले गया और विश्वविद्यालय परिसर में तालाबंदी कर दी गई, जिससे पूरे दिन शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित रहीं और कई विभागों में कक्षाएं पूरी तरह ठप रहीं।
आंदोलनरत कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न विभागों और कक्षाओं का दौरा करते हुए विद्यार्थियों से समर्थन की अपील की। कर्मचारियों का कहना था कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और प्रशासन की उदासीनता के कारण उन्हें मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। इस दौरान कर्मचारियों ने कक्षाओं के बाहर नारेबाजी भी की और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताया। परिणामस्वरूप सोमवार को किसी भी नियमित कक्षा का संचालन नहीं हो सका।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पिछले 16 दिनों से उनकी समस्याओं की ओर न तो विश्वविद्यालय प्रशासन और न ही उच्च शिक्षा विभाग गंभीरता से ध्यान दे रहा है। नॉन टीचिंग कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि एसीपी और एमएसीपी के लाभ को लेकर कई बार बातचीत हुई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। कर्मचारियों ने यह भी कहा कि आंदोलन शुरू होने के बाद से उन्होंने कुलपति का चेहरा तक नहीं देखा, जिससे असंतोष और बढ़ गया है।
संघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय में किसी प्रकार की शैक्षणिक या प्रशासनिक असुविधा उत्पन्न होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
वर्तमान में विश्वविद्यालय परिसर में तनाव का माहौल बना हुआ है और विद्यार्थी पढ़ाई प्रभावित होने से परेशान हैं। अब सभी की नजरें विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार पर टिकी हैं कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर क्या ठोस फैसला लिया जाता है और भविष्य में इस आंदोलन को समाप्त करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।


