Dhanbad: धनबाद नगर निगम के मेयर पद पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी संजीव कुमार की हार के बाद पार्टी में आत्ममंथन का दौर तेज हो गया है। एक सांसद और तीन विधायकों वाली पार्टी को मिली इस अप्रत्याशित हार ने स्थानीय संगठन को समीक्षा के लिए मजबूर कर दिया है।
भाजपा समर्थित प्रत्याशी संजीव कुमार ने कहा कि चुनाव मैदान में उतरे कई प्रमुख उम्मीदवार किसी न किसी रूप में भाजपा पृष्ठभूमि से जुड़े रहे हैं। इससे मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति बनी कि अधिकृत प्रत्याशी कौन है। उन्होंने आरोप लगाया कि बैलेट पेपर से मतदान को लेकर पर्याप्त जागरूकता नहीं चलाई गई, जिसके कारण बड़ी संख्या में वोट अवैध घोषित हो गए।
बैलेट पेपर बना चुनौती
संजीव कुमार के अनुसार कई मतदाताओं ने बैलेट पेपर पर सही तरीके से मुहर नहीं लगाई। कुछ मतदाताओं ने अंगूठा लगा दिया, तो कुछ ने पार्षद पद पर मतदान के बाद मेयर पद के लिए दिए गए गुलाबी बैलेट पेपर को बिना मुहर लगाए ही मतपेटी में डाल दिया। इससे काफी संख्या में वोट रिजेक्ट हो गए।
धनबाद विधायक राज सिन्हा ने भी माना कि चुनाव दलीय आधार पर नहीं होने से मतदाताओं में भ्रम फैला। उन्होंने कहा कि कुछ मतदाताओं को लगा कि अन्य उम्मीदवार भी भाजपा से जुड़े रहे हैं, जिससे वोटों का बंटवारा हुआ। विधायक ने यह भी कहा कि मतदाता ईवीएम के अभ्यस्त हो चुके थे, ऐसे में अचानक बैलेट पेपर से मतदान होने से खासकर युवा मतदाता भ्रमित हुए।
पार्टी स्तर पर होगी समीक्षा
भाजपा जिला अध्यक्ष श्रवण राय ने कहा कि पार्टी इस हार को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक सांसद और तीन विधायकों की मौजूदगी के बावजूद मेयर पद पर हार के कारणों की गहन समीक्षा की जाएगी और संगठनात्मक स्तर पर मंथन कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
पार्टी नेताओं के बयानों से साफ है कि भाजपा आगामी चुनावों को देखते हुए संगठन और चुनावी रणनीति में सुधार की दिशा में कदम उठाने की तैयारी में है।


