Ranchi: झारखंड में हुए नगर निकाय चुनाव के नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका दिया है। शहरी क्षेत्रों में मजबूत जनाधार का दावा करने वाली भाजपा को इस बार अपेक्षित सफलता नहीं मिली। राज्य के 48 शहरी निकायों में महापौर और अध्यक्ष पदों पर पार्टी समर्थित करीब 16 उम्मीदवार ही जीत दर्ज कर सके।
नौ नगर निगमों में से भाजपा समर्थित उम्मीदवार केवल रांची, आदित्यपुर और मेदिनीनगर में जीत हासिल कर पाए। नगर परिषद की 20 सीटों में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों को सिर्फ तीन सीटों पर सफलता मिली। वहीं कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार दो, झामुमो समर्थित चार और स्वतंत्र प्रत्याशी 11 सीटों पर जीतने में सफल रहे।
नगर पंचायतों में भाजपा की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। यहां छह सीटों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार विजयी रहे, जबकि जेएमएम समर्थित चार और आठ स्वतंत्र उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। एक सीट पर भाकपा माले समर्थित प्रत्याशी धनवार से अध्यक्ष पद पर विजयी रहे।

रांची में बची साख, गिरिडीह और देवघर में हार
चुनाव परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि शहरी क्षेत्रों में भाजपा की पकड़ पहले जैसी मजबूत नहीं रही। रांची महापौर सीट पर किसी तरह भाजपा समर्थित प्रत्याशी रोशनी खलखो जीत दर्ज करने में सफल रहीं। लेकिन गिरिडीह और देवघर जैसी अहम सीटें भाजपा के हाथ से निकल गईं। गिरिडीह और देवघर नगर निगम में पहली बार झारखंड मुक्ति मोर्चा समर्थित प्रत्याशी ने जीत दर्ज की।
धनबाद में भी भाजपा समर्थित उम्मीदवार पीछे रह गए। वहीं मानगो नगर निगम के पहले चुनाव में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। बोकारो के चास में पूर्व मेयर भोलू पासवान अपनी सीट बचाने में सफल रहे।
रोशनी खलखो ने राजधानी को “रोशन” करने का किया दावा
रांची में जीत के बाद भाजपा प्रदेश कार्यालय में महापौर बनी रोशनी खलखो का स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि यह जीत कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम है। उनके अनुसार विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पार्टी कार्यकर्ताओं ने संघर्ष किया और जीत सुनिश्चित की। उन्होंने राजधानी को बेहतर ढंग से विकसित करने का संकल्प दोहराया।
भाजपा करेगी परिणामों की समीक्षा
भाजपा ने चुनाव परिणामों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अविनेष कुमार सिंह ने कहा कि परिणाम उम्मीद के अनुरूप नहीं रहे। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी प्रशासनिक भूमिका और अन्य कारणों की समीक्षा करेगी। देवघर समेत कुछ सीटों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग में शिकायत भी की गई है।
नगर निकाय चुनाव के इन नतीजों ने साफ संकेत दिया है कि झारखंड के शहरी क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं और आने वाले चुनावों के लिए सभी दलों को अपनी रणनीति नए सिरे से बनानी होगी।


