Khunti: जहां एक ओर सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे सकारात्मक और प्रेरणादायक उदाहरण भी सामने आते हैं, जो व्यवस्था के भीतर हो रहे बेहतर प्रयासों को दर्शाते हैं। ऐसा ही एक सराहनीय प्रयास कर्रा प्रखंड के घुनसुली गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में देखने को मिला, जहां छोटे-छोटे बच्चों को नाच-गान और खेल-खेल में शिक्षा दी जा रही है। 
आमतौर पर यह देखा जाता है कि प्रारंभिक आयु के बच्चे पढ़ाई को बोझ समझने लगते हैं और किताब-कॉपी से दूरी बनाने लगते हैं। लेकिन घुनसुली आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ाई को इतना रोचक और मनोरंजक बना दिया गया है कि बच्चे उत्साह के साथ रोजाना केंद्र पहुंच रहे हैं। यहां शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

आंगनबाड़ी सेविका मिलोनी सांगा ने बताया कि केंद्र खुलते ही सबसे पहले साफ-सफाई की जाती है, ताकि बच्चों को स्वच्छ वातावरण मिल सके। इसके बाद बच्चों को हल्की एक्सरसाइज कराई जाती है, जिससे वे शारीरिक रूप से सक्रिय और स्वस्थ रहें। फिर परिचय सत्र के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।
उन्होंने बताया कि पढ़ाई को नाच-गान और खेल पद्धति से जोड़ा गया है। गीतों के माध्यम से वर्णमाला और संख्याएं सिखाई जाती हैं, तो वहीं खेल-खेल में रंगों, आकारों और सामान्य ज्ञान की जानकारी दी जाती है। इस पद्धति से बच्चों का मानसिक विकास तो होता ही है, साथ ही उनका शारीरिक और सामाजिक विकास भी सुनिश्चित होता है। 
मिलोनी सांगा ने कहा कि इस प्रकार की शिक्षण पद्धति के लिए विभाग द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाता है, जिससे सेविकाएं बच्चों को बेहतर ढंग से पढ़ा सकें। उन्होंने बताया कि केंद्र में बच्चों की उपस्थिति संतोषजनक है और विभाग की ओर से समय पर पोषाहार भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के प्रयास से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ रही है और अभिभावकों का भी विश्वास मजबूत हो रहा है। घुनसुली का यह आंगनबाड़ी केंद्र इस बात का उदाहरण है कि यदि समर्पण और सही पद्धति के साथ कार्य किया जाए, तो सरकारी व्यवस्था के भीतर भी सकारात्मक बदलाव संभव है।



