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आतंकी साजिशों का गढ़ बनता जमशेदपुर, NIA और दिल्ली पुलिस की रडार पर स्लीपर सेल

Jamshedpur : लौहनगरी जमशेदपुर एक बार फिर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के रडार पर है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि शहर में आतंकी संगठनों के स्लीपर सेल सक्रिय हैं, जिन्हें लेकर लगातार निगरानी, छापेमारी और जांच की जा रही है। हाल के दिनों में हुई गिरफ्तारियों और पूछताछ के बाद एजेंसियों ने शहर के कई इलाकों को हाई अलर्ट पर रखा है।

हाल ही में अलकायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से जुड़े संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद झारखंड एटीएस और एनआईए की टीम जमशेदपुर के संदिग्ध ठिकानों पर पैनी नजर बनाए हुए है। इस जांच का केंद्र जाकिर नगर निवासी डॉ. इश्तियाक अहमद है, जिसे अगस्त 2024 में रांची से गिरफ्तार किया गया था। उस पर भारत को इस्लामिक स्टेट बनाने की साजिश रचने और आतंकी मॉड्यूल का मास्टरमाइंड होने का आरोप है। हाल ही में कपाली के कुछ युवकों से भी इस सिलसिले में पूछताछ की गई है।

डॉक्टर से लेकर टावर कर्मी तक रडार पर
पिछले कुछ वर्षों में हुई गिरफ्तारियां इस बात की ओर इशारा करती हैं कि जमशेदपुर में आतंकी नेटवर्क की जड़ें गहरी रही हैं। दिसंबर 2023 में एनआईए ने जुगसलाई से शाहबाज नामक युवक को गिरफ्तार किया था, जो मोबाइल टावर में काम करता था। इससे पहले वर्ष 2016 में धतकीडीह के अब्दुल समी और ओडिशा के अब्दुल रहमान कटकी को अलकायदा से जुड़े होने के आरोप में पकड़ा गया था। हालांकि कई मामलों में पुख्ता साक्ष्य न मिलने के कारण आरोपी बरी भी हुए, लेकिन एजेंसियों का मानना है कि स्लीपर सेल अब भी सक्रिय हो सकते हैं।

29 संदिग्धों की सूची, रेड कार्नर नोटिस जारी
जांच के दौरान कुल 29 संदिग्धों के नाम सामने आए हैं। इनमें मानगो के आजाद नगर निवासी सैयद मो. अर्शियान हैदर प्रमुख है, जो लंबे समय से फरार है और उसके खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी किया गया है। अर्शियान पर भारत समेत कई देशों में आतंकी हमलों की साजिश रचने का आरोप है। अलकायदा के कथित प्रदेश संचालक अबु सुफियान का नाम भी पुलिस की सूची में शामिल है। अर्शियान के भाई जीशान अली को पहले ही सऊदी अरब से प्रत्यर्पित कर दिल्ली में गिरफ्तार किया जा चुका है।

वर्तमान में एटीएस और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल उन सभी नामों की दोबारा जांच कर रही है, जो पहले पूछताछ में सामने आए थे लेकिन साक्ष्यों के अभाव में उन पर कार्रवाई नहीं हो सकी थी। मानगो, आजाद नगर और जाकिर नगर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों को विशेष निगरानी में रखा गया है।

अनसुलझी घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
शहर में हुई कई पुरानी और अब तक अनसुलझी घटनाएं भी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा रही हैं। 17 अगस्त 2015 को बिष्टुपुर कालीबाड़ी मंदिर के पीछे एक डस्टबिन में हुए जोरदार धमाके की गुत्थी आज तक नहीं सुलझ पाई है। वहीं, जून 2005 में जुगसलाई के एक होटल से बरामद टाइम बम मामले में आरोपी शहनवाज अब तक फरार है।

गिरफ्तारियों का पुराना रिकॉर्ड
वर्ष 2013 में पटना ब्लास्ट मामले की जांच के दौरान एनआईए ने जमशेदपुर से एक संदिग्ध को हिरासत में लिया था। 2014 में पश्चिम बंगाल के वर्धमान विस्फोट कांड में आजाद नगर से शीश महमूद की गिरफ्तारी हुई थी। वहीं, 2015 में दिल्ली से गिरफ्तार अलकायदा के भारत प्रमुख मोहम्मद आसिफ के तार भी जमशेदपुर से जुड़े पाए गए थे।

इन तमाम घटनाओं और जांचों के बीच सुरक्षा एजेंसियां जमशेदपुर को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की तैयारी में जुटी हुई हैं।

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