Ranchi : अंश और अंशिका के रहस्यमयी ढंग से गायब होने के बाद रांची पुलिस की त्वरित कार्रवाई और दोनों बच्चों की सकुशल बरामदगी ने शहर में सक्रिय एक बड़े बच्चा चोरी रैकेट का खुलासा कर दिया है। इस गिरोह के तार कई राज्यों से जुड़े पाए गए हैं। अब तक पुलिस 16 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, जबकि 55 से अधिक बच्चों को रेस्क्यू किया गया है। मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी लगातार सक्रिय है।
भूमिगत हुए नेटवर्क पर एसआईटी की नजर
रांची के सीनियर एसपी राकेश रंजन ने बताया कि लगातार छापेमारी से घबराकर गुलगुलिया गैंग का नेटवर्क फिलहाल अंडरग्राउंड हो गया है, लेकिन पुलिस पूरे नेटवर्क पर नजर बनाए हुए है। जैसे ही अन्य सदस्यों की जानकारी मिलेगी, तत्काल गिरफ्तारी की जाएगी। पुलिस का लक्ष्य गिरोह के अंतिम सदस्य तक पहुंचना है।
तीन लेयर में काम करता था गुलगुलिया गैंग
जांच में सामने आया है कि गुलगुलिया गैंग तीन स्तरों में काम करता था। पहले स्तर पर बच्चों की रेकी कर अपहरण किया जाता था, दूसरे स्तर पर बच्चों को दूसरे राज्यों में ले जाया जाता था और तीसरे स्तर पर बच्चों का इस्तेमाल भीख मंगवाने, चोरी, देह व्यापार और कथित तौर पर अंगों की तस्करी तक में किया जाता था। हालांकि अंग तस्करी की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
पश्चिम बंगाल से संचालित होता था बड़ा नेटवर्क
पुलिस जांच में पश्चिम बंगाल के पुरुलिया निवासी सूरज रवानी को चोरी हुए बच्चों का बड़ा खरीदार बताया गया है। वह बच्चों को खरीदकर उनसे भीख मंगवाने और चोरी की घटनाएं करवाता था। बच्चियों को पालने के बाद देह व्यापार में धकेले जाने की भी बात सामने आई है। बच्चों की बिक्री झारखंड के अलावा बिहार और उत्तर प्रदेश तक किए जाने के संकेत मिले हैं।
गरीब और असहाय बच्चे बनते थे निशाना
गुलगुलिया गैंग के सदस्य हाट-बाजार, स्लम इलाकों और गलियों में बैलून बेचने या कचरा चुनने के बहाने घूमते थे। इस दौरान वे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की पहचान कर उन्हें बहला-फुसलाकर अगवा कर लेते थे। अंश और अंशिका के साथ भी यही तरीका अपनाया गया था।
कुज्जू, सिल्ली और लातेहार से बरामद हुए बच्चे
अपराधियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने सिल्ली, रामगढ़, लातेहार, कुज्जू और बोकारो समेत कई इलाकों से बच्चों को बरामद किया। आरोपियों की निशानदेही पर एक-एक कर पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।
52 बच्चों का होगा डीएनए टेस्ट
बरामद 52 बच्चों में से 40 पर 50 से अधिक लोगों ने दावेदारी की है। पुलिस ने कोर्ट की अनुमति से सभी बच्चों और दावेदारों का डीएनए टेस्ट कराने का फैसला लिया है। एफएसएल की मदद से जांच होगी और रिपोर्ट आने के बाद ही बच्चों को उनके असली परिजनों को सौंपा जाएगा।
12 बच्चों पर कोई दावा नहीं, वात्सल्य पोर्टल पर विवरण
12 ऐसे बच्चे हैं जिन पर अब तक कोई दावेदारी नहीं हुई है। पुलिस ने इन बच्चों की जानकारी और फोटो वात्सल्य पोर्टल पर अपलोड कर दी है, ताकि असली अभिभावक सामने आ सकें। सभी बच्चे फिलहाल सुरक्षित शेल्टर होम में हैं।
आरोपियों की संपत्तियों की जांच तेज
पुलिस ने गिरोह के सरगनाओं की करोड़ों की संपत्तियों पर भी नजर डालनी शुरू कर दी है। रांची, सिल्ली और रामगढ़ में बने आलीशान मकानों की जांच की जा रही है। आशंका है कि ये संपत्तियां बच्चों की तस्करी से अर्जित पैसों से बनाई गई हैं। कोर्ट के आदेश पर संपत्ति जब्ती की कार्रवाई की जाएगी।
400 से अधिक लापता बच्चों की तलाश को नई उम्मीद
इस बड़े खुलासे के बाद झारखंड में वर्षों से लापता 400 से अधिक बच्चों की बरामदगी की उम्मीद जगी है। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार राज्य में बड़ी संख्या में बच्चे अब भी लापता हैं। रांची पुलिस अब नए सिरे से सभी मामलों की समीक्षा कर रही है।



