Ranchi : झारखंड में पेसा नियमावली को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा पेसा नियमावली को लेकर उठाए गए सवालों के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भाजपा पर तीखा पलटवार किया है। झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि पेसा नियमावली से भाजपा नेताओं की कथित गैरकानूनी कमाई पर रोक लगने वाली है, इसी वजह से भाजपा बौखलाई हुई है।
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार द्वारा लाई गई पेसा नियमावली शेड्यूल-5 क्षेत्रों में पेसा एक्ट 1996 को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए बनाई गई है। उन्होंने दावा किया कि पेसा कानून के लागू होते ही भाजपा नेताओं के “पेट में दर्द” शुरू हो गया है, क्योंकि अब उनकी कथित काली कमाई और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा पर सीधा हमला करते हुए झामुमो महासचिव ने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहते हुए भी पेसा कानून के क्रियान्वयन के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। बल्कि उनके कार्यकाल में जनजातीय उपजातियों को लेकर स्वार्थपूर्ण फैसले लिए गए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब अर्जुन मुंडा सत्ता में थे, तब पेसा कानून की याद क्यों नहीं आई।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी को भी निशाने पर लेते हुए सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि वर्ष 2000 में मुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें पेसा कानून की चिंता क्यों नहीं हुई। उस दौर में आदिवासियों पर गोलियां चलीं और आज वही भाजपा आदिवासी हितों की दुहाई दे रही है।
झामुमो नेता ने दावा किया कि झारखंड की आदिवासी जनता भाजपा की सच्चाई समझ चुकी है और 2019 व 2024 के विधानसभा चुनावों में उसे करारा जवाब दे चुकी है। उन्होंने कहा कि पहले भाजपा दबाव बनाकर माइनिंग लीज दिलवाती थी, लेकिन अब पेसा कानून के तहत ग्राम सभा सर्वोच्च हो गई है और अवैध खनन पर रोक लगी है। यही कारण है कि भाजपा नेताओं की घबराहट साफ दिखाई दे रही है।
अन्य राज्यों का हवाला देते हुए सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा में पेसा को लेकर क्या प्रावधान हैं, इस पर भाजपा पहले अपनी ही सरकारों से जवाब ले। उन्होंने आरोप लगाया कि पेसा कानून ने भाजपा के “आर्थिक खेल” पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
अंत में उन्होंने कहा कि पेसा कानून आदिवासियों के अधिकारों का सुरक्षा कवच है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे लागू कर ऐतिहासिक कार्य किया है। भाजपा चाहे जितना भी विरोध करे, झारखंड की आदिवासी जनता उसके साथ जाने वाली नहीं है।



