Chhathra : झारखंड के चतरा जिले में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने और स्थानीय पशुपालकों की आय में सुधार लाने के लिए मेधा डेयरी का कलेक्शन सेंटर जल्द ही स्थापित किया जाएगा। इस केंद्र के माध्यम से पशुपालक अपने दूध और डेयरी उत्पाद सीधे डेयरी को बेच सकेंगे, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य और समय पर भुगतान मिलेगा। इस पहल से क्षेत्र के पशुपालन उद्योग को मजबूती मिलेगी और पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त होने का अवसर मिलेगा।
आधुनिक संसाधनों के साथ 10 केंद्र स्थापित होंगे
जिला प्रशासन और झारखंड राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादन महासंघ लिमिटेड के बीच हुए समझौते के तहत जिले में दूध संग्रहण और विपणन केंद्रों की स्थापना की जाएगी। इसके लिए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट ने 4.98 करोड़ रुपये का आवंटन किया है, जिसका उपयोग मिल्क टैंकर, कूलर, कंटेनर और अन्य आवश्यक उपकरणों की खरीद में किया जाएगा। जिले में कुल 10 संग्रहण और विपणन केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिनमें शहर के तीन स्थानों के अलावा अधिक दूध उत्पादित करने वाले प्रखंड शामिल हैं।
पशुपालकों को मिलेगा सीधे लाभ
इन केंद्रों के माध्यम से प्रतिदिन दूध की खरीद की जाएगी और गुणवत्ता के अनुसार भुगतान किया जाएगा। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और पशुपालकों को सीधे लाभ मिलेगा। जिला प्रशासन का मानना है कि इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, पशुपालक आधुनिक तरीके से दुग्ध उत्पादन के लिए प्रेरित होंगे, और नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। मेधा डेयरी की ओर से गुणवत्ता जांच, समयबद्ध भुगतान और तकनीकी सहयोग की भी व्यवस्था की जाएगी।
अन्य डेयरी उत्पादों की भी बिक्री होगी
संग्रहण और विपणन केंद्रों में दूध के अलावा दही, पनीर, घी, खोवा और राबड़ी जैसी अन्य डेयरी उत्पादों की भी बिक्री की जाएगी। यह व्यवस्था पशुपालकों को अपने उत्पादों की पूरी श्रृंखला को बाजार में उतारने का अवसर प्रदान करेगी।
केंद्रों के स्थान और प्रशासनिक प्रक्रिया
कलेक्शन सेंटर स्थापित करने के लिए दस स्थान चिन्हित किए गए हैं। इनमें शहर के नगवां मोहल्ला, जतराहीबाग, लाइन मोहल्ला, सदर प्रखंड के देवरिया और किशुनपुर, और प्रखंडों इटखोरी, गिद्धौर, हंटरगंज, टंडवा (मिश्रौल व गाड़ीलौंग) शामिल हैं। इन स्थानों पर झारखंड राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादन महासंघ की टीम ने स्थल निरीक्षण कर लिया है।
योजना का क्रियान्वयन
दरअसल, यह योजना तीन-चार साल से लंबित थी। ग्रामसभा और शासकीय परिषद से पारित होने के बाद तत्कालीन उपायुक्त अबु इमरान ने इसे लागू करने का प्रयास किया, लेकिन वह अमली जामा नहीं पहन सका। उनके स्थानांतरण के बाद नई उपायुक्त कीर्तिश्री जी ने योजना को गति दी और झारखंड राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादन महासंघ के साथ करार किया। प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद इस योजना का क्रियान्वयन जल्द ही प्रारंभ होगा।
इस पहल से चतरा जिले में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय पशुपालक आर्थिक रूप से सशक्त होंगे।



