Dhanbad : झारखंड सरकार ने भारतीय वन सेवा (IFS) 1992 बैच के वरिष्ठ अधिकारी संजीव कुमार को राज्य का नया प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (PCCF–HoFF) नियुक्त किया है। यह पद अशोक कुमार के 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होने के बाद रिक्त था। उनकी नियुक्ति से वन विभाग में एक नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
संजीव कुमार की पृष्ठभूमि और अनुभव
संजीव कुमार ने अपने सेवाकाल की शुरुआत बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से की थी। इसके बाद उन्होंने गुमला, जमुई, रांची, धनबाद और जमशेदपुर जैसे महत्वपूर्ण जिलों में Divisional Forest Officer (DFO) के रूप में कार्य किया। सिंहभूम क्षेत्र के चाईबासा में उन्होंने वन संरक्षक के रूप में सेवाएं दी।
हजारीबाग में क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने वनों के संरक्षण के साथ जनभागीदारी पर जोर दिया। CAMPA और झारखंड राज्य जैव विविधता बोर्ड में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पद पर कार्य किया। वन सुरक्षा समितियों के माध्यम से वनों की रक्षा और ग्रामीण विकास को जोड़ने का प्रयास किया।
‘वृक्ष रक्षाबंधन’ और ग्रामीण सहभागिता
संजीव कुमार का मानना है कि स्थानीय समुदाय को वनों से प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिलेगा, तो संरक्षण संभव नहीं है। इसी सोच के तहत उन्होंने झारखंड के 1500 से अधिक गांवों में ‘वृक्ष रक्षाबंधन’ कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें ग्रामीणों को पेड़ों से भावनात्मक रूप से जोड़ा गया। इसके अलावा उन्होंने लाह और तसर की खेती को बढ़ावा देकर हजारों ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ा। उनके इस प्रयास को राज्य सरकार और विभिन्न संस्थाओं द्वारा कई बार सम्मानित किया गया है।
शोध और अंतरराष्ट्रीय योगदान
संजीव कुमार ने देश-विदेश के सम्मेलनों में 100 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं, जो वन संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में उनके योगदान को दर्शाते हैं। संक्षेप में, संजीव कुमार का अनुभव, ग्रामीण सहभागिता पर जोर और ‘वृक्ष रक्षाबंधन’ जैसी पहल उन्हें झारखंड के वन विभाग के लिए एक प्रभावशाली और नवोन्मेषी नेता बनाती है।



