Deoghar : प्रधानमंत्री आवास योजना (साझेदारी में किफायती आवास) मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के सपनों को साकार करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। योजना के तहत आवासों का निर्माण कार्य शुरू हुआ और लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से लाभुकों को फ्लैट भी आवंटित कर दिए गए। लेकिन छह साल बीतने के बाद भी लाभार्थी अपने नए घर में प्रवेश नहीं कर सके, क्योंकि निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। इससे लोगों में भारी निराशा है।
लाभार्थियों ने अपने हिस्से की राशि किसी ने बैंक से कर्ज लेकर, तो किसी ने अपने गहने बेचकर या पाई-पाई जोड़कर जमा की। सभी को उम्मीद थी कि जल्द ही उनका अपना आशियाना होगा, लेकिन उनका सपना अभी भी अधूरा है। विभाग निर्माण एजेंसी जुडको को जिम्मेदार बताकर अपना पल्ला झाड़ चुका है, जबकि जुडको 14 दिसंबर तक गृह प्रवेश कराने का आश्वासन दे रहा है।
लाभुक झेल रहे दोहरी मार — ब्याज और किराया दोनों देना पड़ रहा
आवास न मिलने के कारण लाभुकों को दोहरी आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है। एक ओर बैंक से लिए गए लोन का ब्याज चुकाना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर किराये के घर में रहकर किराया देना पड़ रहा है। कई लाभुक वर्षों से विभाग का चक्कर काटते-काटते थक चुके हैं, लेकिन अब भी स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा कि उन्हें घर कब मिलेगा।
लाभार्थियों की पीड़ा — जमा की राशि, लिया कर्ज, बेचे गहने… लेकिन घर नहीं
लाभार्थियों ने अपनी पीड़ा को खुलकर सामने रखा है।
कविता चौधरी बताती हैं कि 4.24 लाख रुपये भुगतान करने के लिए उन्होंने बैंक से लोन लिया और गहना भी बेचा, लेकिन अब तक घर नहीं मिला। छह महीने बाद बेटी की शादी है, ऐसे में ब्याज, किराया और शादी—तीनों संभालना मुश्किल हो रहा है।
अभय कुमार पांडेय कहते हैं कि उन्होंने 2023 में अपना फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़कर राशि जमा कराई, लेकिन आज तक आवास नहीं मिला। विभाग कोई ठोस जवाब नहीं दे रहा।
गोपाल प्रसाद सुल्तानिया बताते हैं कि किस्त दर किस्त राशि जमा कराई, आवास आवंटन भी हुआ, लेकिन कब मिलेगा इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है।
अमृत मिश्रा बताते हैं कि एक साल से अधिक समय से ब्याज और किराया दोनों देना पड़ रहा है। “घर मिला नहीं, उल्टा दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।”
सुधा देवी कहती हैं कि राशि जमा कराने के लिए विभाग नोटिस भेजता था, लेकिन अब अधिकारी जवाबदेही से बच रहे हैं।
लोन चुकाएं या किराया, किसे दें प्राथमिकता — लाभुकों की बढ़ी चिंता
कई लाभुकों ने बैंक से लोन लेकर रकम जमा कराई, लेकिन घर न मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। आवास की चाबी न मिलने से उनके सामने अब तनाव और कर्ज दोनों बढ़ गए हैं। बार-बार विभाग के चक्कर लगाने पर भी कोई ठोस जवाब या समाधान नहीं मिल रहा।
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य था कि हर नागरिक के पास अपना घर हो, लेकिन देवघर के लाभार्थियों के लिए यह सपना अब तक साकार नहीं हो पाया है। लाभुक अब एक ही सवाल पूछ रहे हैं—आखिर उन्हें उनका घर कब मिलेगा?



