Ranchi : झारखंड के पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता को लेकर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने उनकी नियुक्ति से लेकर निलंबन, सेवा विस्तार और इस्तीफे तक की पूरी प्रक्रिया पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। मरांडी का कहना है कि वसूली, तस्करी और अवैध उत्खनन जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद सरकार ने स्वतंत्र जांच नहीं कराई। उनका मानना है कि इतने बड़े विवादों को अनदेखा करना सरकार की मंशा पर सवाल उठाता है। वे लगातार आरोप लगा रहे हैं कि मामला सिर्फ नियुक्ति का नहीं, बल्कि उससे कहीं गहरा है।
मरांडी के आरोप: शराब कांड से लेकर कफ सिरप तस्करी तक
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि शराब घोटाले में उन्होंने पहले ही सरकार को चेताया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। सीबीआई की जांच में आईएएस विनय चौबे की गिरफ्तारी हुई, पर एसीबी के DG रहते 90 दिन तक चार्जशीट न दाखिल होने से आरोपी को जमानत मिल गई। उन्होंने कहा कि कफ सिरप तस्करी को लेकर भी राज्य सरकार की ओर से लापरवाही बरती गई। जब गुजरात पुलिस ने कार्रवाई की, तो अनुराग गुप्ता ने सीआईडी जांच के नाम पर हस्तक्षेप किया। मरांडी का आरोप है कि इन मामलों में सरकार और गुप्ता दोनों की भूमिका संदिग्ध रही है।
पूर्व DGP पर अपराधियों से गठजोड़ के गंभीर आरोप
बाबूलाल मरांडी का दावा है कि अनुराग गुप्ता का गैंगस्टर सुजीत सिन्हा और उसके गिरोह के साथ सीधा गठजोड़ था। उन्होंने कहा कि अवैध बालू, कोयला, पत्थर और शराब कारोबार से होने वाली कमाई का 40% हिस्सा गुप्ता तक जाता था। “कोयलांचल शांति समिति” नाम का संगठन बनाकर वसूली को संगठित रूप दिया गया। मरांडी का आरोप है कि हेमंत सोरेन सरकार ने नियमों की अनदेखी कर लेनदेन के आधार पर गुप्ता को डीजीपी नियुक्त किया। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे का हवाला देते हुए NIA जांच की भी मांग की है।
कौन हैं अनुराग गुप्ता और किन विवादों से जुड़ा रहा करियर
1990 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे और कई बार विवादों में भी फंसे। 2016 के राज्यसभा चुनाव में विधायकों को प्रभावित करने के आरोप के बाद उन्हें 2020 में निलंबित किया गया था। रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें डीजीपी बनाए रखने पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव बढ़ा। बाद में अवैध उत्खनन, वसूली और गैंगस्टरों से गठजोड़ के आरोपों ने विवाद को और गहरा कर दिया। नवंबर 2025 में लगातार बढ़ते कानूनी दबाव के बीच उन्होंने DGP पद से इस्तीफा दे दिया।
2016 राज्यसभा चुनाव और राजनीतिक दबाव का प्रश्न
2016 के राज्यसभा चुनाव में खरीद-फरोख्त के आरोप आज भी राजनीति में गरमाहट पैदा करते हैं। बाबूलाल मरांडी द्वारा जारी ऑडियो टेप में कांग्रेस विधायक को भाजपा के पक्ष में वोट देने के लिए मनाने की बात सामने आई थी। इस आधार पर रघुवर दास, अजय कुमार और अनुराग गुप्ता पर FIR दर्ज हुई और CID जांच शुरू हुई। हेमंत सोरेन सरकार आने के बाद इस मामले में PC Act जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। मरांडी का आरोप है कि कई संवेदनशील दस्तावेज हटाए गए और राजनीतिक दबाव बनाकर जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई, जिस पर सरकार को जवाब देना चाहिए।



