Khunti: जंगली हाथियों के बढ़ते आतंक से परेशान ग्रामीणों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है। लगातार हाथी के हमले से जहां लोगों की मौतें हो रही है तो वहीं फसल सहित कई प्रकार से आर्थिक नुकसान भी हो रही है।
अब इस मामले को लेकर खूंटी के सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप मिश्रा ने झारखण्ड के मुख्य वन्य संरक्षक को पत्र लिखकर इसका स्थाई समाधान करने की मांग की है पत्र में उन्होंने लिखा है कि खूंटी जिला सहित झारखंड के कई जिलों में ग्रामीण हाथियों के लगातार प्रकोप से परेशान हैं। हाथियों के झुंड खेतों में आकर फसलें बर्बाद कर रहे हैं और लोगों की जान-माल को गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। ग्रामीण रातभर जागकर भी अपनी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं।
हाथियों के हमले में कई लोगों की जान जा चुकी है और परिवार बिखर चुके हैं। सरकार द्वारा मृतकों और क्षतिग्रस्त फसलों के लिए मुआवजा राशि दी जाती है, लेकिन यह सीमा तय है और वास्तविक नुकसान की भरपाई नहीं हो पाती। ग्रामीणों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
अभी तक अस्थायी कॉरिडोर या स्थायी निवास समाधान नहीं बनाया गया है। हाथियों की सुरक्षा के लिए योजना नहीं होने से आम जनता लगातार खतरे में है। ग्रामीण अपने टैक्स के पैसे से मुआवजा पाते हैं, लेकिन स्थायी उपायों की कमी उन्हें असुरक्षित बनाती है।
जंगलों की अंधाधुंध कटाई और अवैध गतिविधियों ने हाथियों को गांवों की ओर धकेल दिया है। इससे फसलों और मानव जीवन पर खतरा लगातार बढ़ रहा है। अवैध कटाई रोकने के साथ ही हाथियों के लिए सुरक्षित मार्ग और निवास स्थान बनाने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार पूरे झारखंड में अस्थायी कॉरिडोर और स्थायी समाधान बनाना चाहिए। इससे हाथियों के प्रकोप से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। यह कदम दोनों पक्षों के हित में होगा।
अतः वन विभाग और राज्य सरकार से निवेदन है कि हाथियों के प्रकोप से होने वाली जान-माल की हानि को रोकने के लिए तत्काल ठोस पहल की जाए। इससे ग्रामीण सुरक्षित रहेंगे और हाथियों का भी संरक्षण सुनिश्चित होगा।



