Ranchi : झारखंड में कुड़मी समाज ने अपने आदिवासी दर्जे (ST Status) की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। आदिवासी संगठनों के विरोध के बावजूद कुड़मी संगठनों ने साफ कहा है कि उनका आंदोलन अब किसी के दबाव या विरोध से नहीं रुकेगा।
कुड़मी समन्वय समिति के प्रमुख शीतल ओहदार ने रांची में कहा कि अगले वर्ष 11 जनवरी 2026 को मोरहाबादी मैदान में महारैली होगी। वहीं से राज्यव्यापी आर्थिक नाकेबंदी की घोषणा की जाएगी। उन्होंने कहा — “हम संविधान सम्मत अपना हक मांग रहे हैं, किसी का अधिकार नहीं छीन रहे।”
ओहदार ने कहा कि कुड़मी समाज की मांग सिर्फ अनुसूचित जनजाति में शामिल होने की नहीं, बल्कि कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की भी है। यह आंदोलन दशकों पुरानी ऐतिहासिक मांगों को लेकर है, जिसे अब युवा पीढ़ी निर्णायक मोड़ तक ले जाने के लिए तैयार है।
मोरहाबादी महारैली से पहले समाज ने राज्यव्यापी रैलियों का कार्यक्रम तय किया है। इसके तहत 2 नवंबर को हजारीबाग, 16 नवंबर को चंदनकियारी, 23 नवंबर को जमशेदपुर, 2 दिसंबर को धनबाद और 14 दिसंबर को नवाडीह (बोकारो) में रैलियां होंगी। इन सभी आयोजनों का उद्देश्य समाज में जागरूकता बढ़ाना है।
कुड़मी संगठनों ने कहा कि बीते 75 वर्षों से कुड़मी समाज अपने अधिकारों से वंचित है। अब समय आ गया है कि समाज एकजुट होकर अपनी पहचान और अधिकार की लड़ाई को निर्णायक चरण तक ले जाए। आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन इसे रोकने की किसी भी कोशिश का जवाब दिया जाएगा।
संगठनों ने राज्य सरकार को चेताया है कि यदि 11 जनवरी की महारैली तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, तो आर्थिक नाकेबंदी का आंदोलन शुरू किया जाएगा। ओहदार ने कहा — “हम न किसी से टकराना चाहते हैं, न झुकना। बस संविधान में अपनी जगह चाहते हैं, जो हमें मिलनी ही चाहिए।”



