Ranchi : झारखंड कांग्रेस ने 20 जिलों में नए जिलाध्यक्षों की घोषणा कर दी है, जिनमें दो विधायक भी शामिल हैं। पार्टी का उद्देश्य संगठन को मजबूत बनाना है, लेकिन कुछ नियुक्तियों को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। खासकर कुछ जिलाध्यक्षों की सदस्यता और उनकी राजनीतिक निष्ठा को लेकर अंदरूनी चर्चा तेज है।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि यह कदम संगठन सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण है। बोकारो से लेकर सिमडेगा तक पुराने और नए चेहरों का मिश्रण देखने को मिला है। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने नए जिलाध्यक्षों की सूची जारी की, जिसमें कई वरिष्ठ नेताओं की सिफारिशों का असर साफ नजर आया।
नई सूची में विधायकों ममता देवी (रामगढ़) और भूषण बाड़ा (सिमडेगा) को जिलाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि पूर्व विधायक जयप्रकाश पटेल को हजारीबाग की जिम्मेदारी दी गई है। कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी देकर संगठन को स्थायित्व और मजबूती मिलेगी। छठ के बाद नई कमेटी के गठन की भी उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि, कांग्रेस की इस नई टीम में कई नामों को लेकर असंतोष झलक रहा है। चतरा और लातेहार में जिलाध्यक्षों की सदस्यता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रदेश प्रभारी के.राजू ने नए लोगों को मौका देने की बात कही थी, लेकिन कई जिलों में पुराने नेताओं और मंत्रियों की पसंद को तरजीह दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, जामताड़ा में दीपिका बेसरा को मंत्री इरफान अंसारी की सिफारिश पर दोबारा मौका मिला है। देवघर में प्रदीप यादव के करीबी मुकुंद दास को जिलाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि धनबाद में संतोष कुमार सिंह को अनूप सिंह की पैरवी से जिम्मेदारी मिली। इसी तरह कोडरमा के प्रकाश रजक हाल ही में माले छोड़कर कांग्रेस में आए हैं।
गुमला में सुखदेव भगत के प्रतिनिधि राजनील तिग्गा को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। साहेबगंज में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम की पसंद का असर दिखा, वहीं सरायकेला-खरसावां में राज बागची को एक साल के भीतर कांग्रेस में शामिल होने के बावजूद जिला नेतृत्व सौंपा गया। कुल मिलाकर, नई टीम में संगठन विस्तार से अधिक “संतुलन साधने” की कोशिश दिख रही है।



