Breaking News

कुर्मियों को आदिवासी दर्जा देने की मांग के विरोध में 20 सितंबर को आदिवासियों का विशाल धरना-प्रदर्शन

Ranchi: केंद्रीय धुमकुड़िया, करमटोली में झारखंड के विभिन्न आदिवासी संगठनों ने सोमवार को संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित कर कुर्मी/कुड़मी समुदाय को आदिवासी दर्जा देने की मांग का कड़ा विरोध किया। संगठनों ने घोषणा की कि 20 सितंबर 2025 को राजधानी रांची में एक दिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा, जिसमें पूरे राज्य के आदिवासी समुदाय के लोग शामिल होंगे।

प्रेस वार्ता में संगठनों ने कहा कि कुर्मी/कुड़मी समाज द्वारा आदिवासी दर्जा पाने की मांग पूरी तरह से गलत और तथ्यों पर आधारित नहीं है। उन्होंने इसे आदिवासी समाज के हक, अधिकार और अस्तित्व पर सीधा हमला बताया।

“फर्जी इतिहास और संस्कृति गढ़ रहे हैं” – लक्ष्मी नारायण मुंडा

प्रेस को संबोधित करते हुए आदिवासी नेता लक्ष्मी नारायण मुंडा ने कहा कि कुर्मी/कुड़मी समाज के नेता फर्जी इतिहास, संस्कृति और सभ्यता गढ़कर अपने ही समाज के लोगों को दिग्भ्रमित करने का कार्य कर रहे हैं। “वे आदिवासी समाज के अधिकारों पर हमला कर रहे हैं और हमें कमजोर करने के लिए आदिवासी बनाए जाने की मांग कर रहे हैं,” उन्होंने कहा।

“रेल टेका आंदोलन से सरकार को भारी नुकसान” – कुन्दरसी मुंडा

सामाजिक कार्यकर्ता कुन्दरसी मुंडा ने कहा कि कुर्मी समाज द्वारा 20 सितंबर को प्रस्तावित ‘रेल टेका आंदोलन’ से सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान होगा। “अगर कुर्मी समुदाय को आदिवासी बना दिया गया तो आदिवासियों का हक, अधिकार, आरक्षण और जमीन सब कुछ खतरे में पड़ जाएगा,” उन्होंने कहा।

“हम राजभवन टेका करेंगे” – फूलचंद तिर्की

केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने कहा कि अगर कुर्मी समाज रेल टेका करता है, तो आदिवासी समाज “राजभवन टेका” करेगा। उन्होंने कहा, “हम शांतिपूर्वक विरोध करेंगे लेकिन हमारी आवाज दबाने की कोशिश हुई तो बड़ा आंदोलन होगा।”

“सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो उग्र आंदोलन” – निरंजना हेरेंज टोप्पो

जय आदिवासी केंद्रीय परिषद की महिला अध्यक्ष निरंजना हेरेंज टोप्पो ने केंद्र सरकार और भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कुर्मी समुदाय के रेल टेका आंदोलन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो आदिवासी समाज भी सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगा।

“हमारा अस्तित्व खतरे में” – निशा भगत व डब्लू मुंडा

केंद्रीय सरना समिति की महिला अध्यक्ष निशा भगत और डब्लू मुंडा ने कहा कि झारखंड में कुर्मी-कुड़मी समुदाय जबरन आदिवासी बनाए जाने की मांग कर रहा है, जो कहीं से भी जायज नहीं है। “अगर ऐसा हुआ तो हमारी जमीनों पर उनका अवैध कब्जा वैध हो जाएगा और हमारा अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा। केंद्र सरकार अगर हमें नजरअंदाज करती है तो हम भी उसे चेताने का काम करेंगे,” उन्होंने कहा।

“झारखंड आदिवासियों का है और रहेगा” – राजेश लिंडा

‘माय माटी संस्कृति बचाओ मोर्चा’ के राजेश लिंडा ने कहा, “यह झारखंड आदिवासियों का है और आदिवासियों का ही रहेगा। केंद्र और राज्य सरकार को इसे मणिपुर या नेपाल बनाने से बचना चाहिए।”

कई संगठनों के नेता रहे मौजूद

प्रेस वार्ता में अमर तिर्की, हर्षिता मुंडा, लक्ष्मी मुंडा, सुनील टोप्पो, अजय खलखो, रतन उरांव, प्रकाश मुंडा सहित कई आदिवासी संगठनों के नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

सभी संगठनों ने संयुक्त रूप से 20 सितंबर को रांची में आयोजित होने वाले विशाल धरना-प्रदर्शन को सफल बनाने का आह्वान किया।

Share Article:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

विज्ञापन

SWARAJ

त्योहार के मौकेपर धमाकेदार ऑफर

संपर्क करें:- खूंटी- 8210983506 तोरपा - 6203436010

Recent Posts

Tags

Edit Template

About

Print & Digital PR News Release Ranchi,

Recent Post