Ranchi: झारखंड में हजारों पुलिस केस लंबे समय से पेंडिंग पड़े हैं। अब राज्य पुलिस ने इन मामलों को जल्द निपटाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जिन अधिकारियों की लापरवाही से केस अटके हुए हैं, उनकी पहचान की जा रही है।
डीजीपी ने एसपी को सौंपी जिम्मेदारी
डीजीपी अनुराग गुप्ता ने सभी जिलों के एसपी को लंबित मामलों की सूची सौंपी है। उन्होंने वर्ष 2020 से 2025 तक के पेंडिंग केसों की जानकारी मांगी है और यह पता लगाने को कहा है कि किन पुलिस पदाधिकारियों की वजह से केस रुके हुए हैं।
लंबित मामलों की बनाई गई पूरी सूची
झारखंड पुलिस मुख्यालय ने पूरे राज्य के पेंडिंग मामलों की एक विस्तृत सूची तैयार की है। यह सूची सभी जिलों के एसपी को भेजी गई है। साथ ही जोनल आईजी और डीआईजी को निर्देश दिया गया है कि वे इसकी गहन जांच कर देरी के असली कारणों का पता लगाएं।
लापरवाही पहचानने के लिए तय हुए मानक
डीजीपी ने कुछ स्पष्ट इंडिकेटर जारी किए हैं। जैसे – तीन महीने तक सुपरविजन न होना, छह महीने से डायरी न लिखा जाना, वारंट जारी होने के बावजूद उसकी तामील न होना। ऐसे 6-7 बिंदुओं के आधार पर यह तय किया जाएगा कि कौन अधिकारी काम में ढिलाई बरत रहे हैं।
अक्टूबर में होगी समीक्षा बैठक
डीजीपी ने साफ कहा है कि अक्टूबर के पहले सप्ताह में राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक होगी। इसमें जोनल आईजी और डीआईजी से रिपोर्ट ली जाएगी। इस बैठक में यह भी देखा जाएगा कि किन एसपी, डीएसपी, थानेदार, इंस्पेक्टर और आईओ ने लापरवाही दिखाई है।
कार्रवाई और सुधार पर होगा फैसला
समीक्षा बैठक के बाद तय होगा कि लापरवाह पुलिस अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जाए या उनके कार्यशैली में सुधार लाने के लिए कौन से कदम उठाए जाएं। माना जा रहा है कि इस पहल से पेंडिंग केसों की संख्या घटेगी और न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी।



