Ranchi : रांची नगर निगम (आरएमसी) द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के खिलाफ शहर के पथ विक्रेताओं का विरोध तेज हो गया है। इंडियन हॉकर एलायंस (आईएचए) और एआईटीयूसी के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन में नगर निगम पर स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं सड़क विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014, झारखंड सरकार की पथ विक्रेता नीति और न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान संगठनों के नेताओं ने आरोप लगाया कि नगर निगम बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए पथ विक्रेताओं को हटाने की कार्रवाई कर रहा है। उनका कहना है कि कई सप्ताह से पुलिस और नगर निगम की टीम शहर के विभिन्न हिस्सों में सड़क किनारे दुकान लगाने वाले लोगों को हटा रही है, जबकि न तो उन्हें पहले से कोई नोटिस दिया गया, न सर्वे कराया गया और न ही वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया गया। इससे हजारों छोटे दुकानदारों और उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
प्रदर्शनकारियों ने विशेष रूप से मोरहाबादी के करीब 40 वर्ष पुराने साप्ताहिक बाजार का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि इस बाजार से बड़ी संख्या में किसान, ग्रामीण और महिला विक्रेता जुड़े थे, जो यहां अपनी उपज और सामान बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। नगर निगम द्वारा बाजार हटाए जाने के बाद सैकड़ों परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
आईएचए और एआईटीयूसी के प्रतिनिधियों ने कहा कि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014 के तहत किसी भी पथ विक्रेता को हटाने से पहले सर्वेक्षण, टाउन वेंडिंग कमेटी की प्रक्रिया, पहचान पत्र जारी करना और वेंडिंग जोन का निर्धारण अनिवार्य है। उनका आरोप है कि नगर निगम ने इन कानूनी प्रावधानों का पालन किए बिना बेदखली अभियान चलाया है।
आईएचए के नेता संदीप वर्मा ने कहा कि नगर निगम की कार्रवाई गरीबों की रोजी-रोटी पर सीधा प्रहार है। वहीं सीपीआई नेता महेंद्र पाठक ने कहा कि पथ विक्रेता शहर की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और सरकार तथा नगर निगम की जिम्मेदारी उन्हें संरक्षण देने की है, न कि उनकी आजीविका छीनने की।
संगठनों ने नगर निगम से मांग की है कि बेदखली अभियान तत्काल रोका जाए, सभी पथ विक्रेताओं का सर्वे कर उन्हें पहचान पत्र जारी किया जाए, विधिवत वेंडिंग जोन विकसित किए जाएं और जिनकी दुकानें हटाई गई हैं, उनका शीघ्र पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि सात दिनों के भीतर इन मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो रांची में बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।

