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झारखंड में चार नए सूचना आयुक्तों ने ली शपथ, वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे की उम्मीद

Ranchi : झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने लोकभवन में आयोजित एक समारोह में चार नए सूचना आयुक्तों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। नवनियुक्त सूचना आयुक्तों में अनुज सिन्हा, तनुज खत्री, अमूल्य नीरज खलखो और शिवपूजन पाठक शामिल हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित कई वरिष्ठ नेता और गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

शपथ ग्रहण समारोह लोकभवन के दरबार हॉल में आयोजित किया गया, जहां राज्यपाल ने सभी नवनियुक्त आयुक्तों को शपथ दिलाई। इसके बाद मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट कर शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, राज्यसभा सांसद बैजनाथ राम, महुआ माजी, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर समेत कई प्रमुख नेता उपस्थित थे।

लंबे समय से झारखंड राज्य सूचना आयोग में रिक्त पदों के कारण कार्य प्रभावित हो रहा था। नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के बाद आयोग के पुनः सक्रिय होने की उम्मीद जताई जा रही है। अब वर्षों से लंबित पड़े मामलों की सुनवाई प्रक्रिया फिर से शुरू हो सकेगी।

जानकारी के अनुसार, 8 मई 2020 को तत्कालीन प्रभारी मुख्य सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर चौधरी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद आयोग में सुनवाई पूरी तरह से ठप हो गई थी। इसके बाद से लगभग 25 हजार अपील लंबित पड़ी हुई हैं। हर दिन जिलों से लगभग 100 नई अपीलें आयोग में पहुंचती हैं, जिससे लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ता गया।

झारखंड राज्य सूचना आयोग का गठन 24 जुलाई 2006 को किया गया था। इसके पहले मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) हरि शंकर प्रसाद ने 30 जुलाई 2006 को शपथ ली थी और 30 जून 2008 तक पद पर रहे। उनके कार्यकाल के दौरान अन्य छह सूचना आयुक्तों ने भी कार्यभार संभाला था।

इसके बाद न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) दिलीप कुमार सिन्हा ने 5 अगस्त 2011 को मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में शपथ ली और 31 जुलाई 2014 तक पद पर रहे। उनके बाद 24 अप्रैल 2015 को आईएएस (सेवानिवृत्त) आदित्य स्वरूप मुख्य सूचना आयुक्त बने। उनके साथ प्रबोध रंजन दास और हिमांशु शेखर चौधरी ने राज्य सूचना आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था।

नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे सूचना के अधिकार (RTI) से जुड़े मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। लंबे समय से लंबित मामलों के समाधान से आम नागरिकों को भी राहत मिलने की संभावना है।

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